Data Centers: पावर से ज्यादा अब नेटवर्क की डिमांड, भारत में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की बदल रही तस्वीर

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Data Centers: पावर से ज्यादा अब नेटवर्क की डिमांड, भारत में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की बदल रही तस्वीर

भारत में डेटा सेंटर ऑपरेटर्स की प्राथमिकताएं बदल गई हैं। 2026 की एक हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, अब पावर की उपलब्धता से ज्यादा महत्व नेटवर्क स्पीड को दिया जा रहा है। AI की बढ़ती जरूरतों के बीच यह बदलाव काफी अहम है क्योंकि देश की ऑपरेशनल कैपेसिटी अब **2 GW** के करीब पहुंच रही है।

भारतीय डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। डेटा सेंटर के लिए साइट चुनते समय अब 'पावर सप्लाई' के मुकाबले 'नेटवर्क कनेक्टिविटी' को पहली प्राथमिकता दी जा रही है। 2026 के एक इंडस्ट्री सर्वे के अनुसार, 75% ऑपरेटर्स ने नेटवर्क एक्सेसिबिलिटी को टॉप प्रायोरिटी बताया है, जबकि 67% ही पावर को लेकर गंभीर हैं।

AI का बढ़ता प्रभाव

यह बदलाव आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की जरूरतों के कारण आया है। पहले एक डेटा सेंटर रैक के लिए 8 से 10 किलोवाट (kW) पावर की जरूरत होती थी, लेकिन अब AI-रेडी फैसिलिटी के लिए 30 से 50 kW पावर की मांग है। इतनी ज्यादा डेंसिटी के कारण अब हाई-स्पीड फाइबर-ऑप्टिक केबल और लैंडिंग स्टेशनों के पास रहना अनिवार्य हो गया है।

सेक्टर का विस्तार और रिस्क

भारत में डेटा कैपेसिटी तेजी से बढ़ रही है। 2026 की पहली छमाही तक यह 1.75 गीगावाट (GW) तक पहुंच गई है और साल के अंत तक 2 GW का आंकड़ा छूने की उम्मीद है। 2021 से अब तक इस सेक्टर में $173 बिलियन से ज्यादा का निवेश हो चुका है।

हालांकि, चुनौतियां भी कम नहीं हैं। देश की 80% से ज्यादा कैपेसिटी फिलहाल मुंबई और चेन्नई जैसे शहरों में केंद्रित है। पावर ग्रिड पर बढ़ता दबाव और अलग-अलग राज्यों के बीच नियमों की विसंगति भविष्य में प्रोजेक्ट्स की लागत बढ़ा सकती है और देरी का कारण बन सकती है। निवेशकों के लिए अब नए हब जैसे हैदराबाद, बेंगलुरु और कोलकाता में चल रहे प्रोजेक्ट्स पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.