भारतीय IT सेक्टर के लिए अच्छी खबर है! Nasscom की चेयरपर्सन श्रीकांत वेल्लामक्कनी का मानना है कि फाइनेंशियल ईयर 2028 (FY28) से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की वजह से सेक्टर की कमाई में बड़ी तेजी देखने को मिल सकती है। यह अनुमान 2026 में ग्लोबल IT खर्च में **14.2%** की बढ़ोतरी के साथ मेल खाता है। हालांकि, निवेशकों की नज़र इस बात पर है कि कंपनियां पुराने आउटसोर्सिंग मॉडल से AI-बेस्ड सॉल्यूशंस की ओर कितनी जल्दी शिफ्ट हो पाती हैं।
IT सेक्टर में नए ग्रोथ साइकल की आहट
भारतीय IT सर्विसेज इंडस्ट्री एक नए ग्रोथ साइकल के लिए खुद को तैयार कर रही है। Nasscom के लीडरशिप का मानना है कि आने वाला फाइनेंशियल ईयर 2028 (FY28) इस सेक्टर के लिए रेवेन्यू एक्सीलरेशन (Revenue Acceleration) का एक बड़ा मोड़ साबित हो सकता है। Nasscom के चेयरपर्सन श्रीकांत वेल्लामक्कनी ने हाल ही में इस बात पर जोर दिया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) इस सेक्टर के लिए खतरे के बजाय, ग्रोथ का मुख्य जरिया बन रहा है। इंडस्ट्री ने भले ही धीमी डिमांड और क्लाइंट की तरफ से खर्चीलेपन में सावधानी के दौर का सामना किया हो, लेकिन AI-बेस्ड सॉल्यूशंस की ओर बढ़ना आने वाले सालों में एक महत्वपूर्ण मोमेंटम (Momentum) पैदा करने की उम्मीद है।
ग्लोबल खर्च के रुझान और AI इंफ्रास्ट्रक्चर
यह उम्मीद ग्लोबल टेक्नोलॉजी बजट में हो रहे बड़े बदलावों से भी मज़बूत होती है। रिसर्च फर्म Gartner ने 2026 के लिए ग्लोबल IT खर्च का अनुमान $6.37 ट्रिलियन तक पहुंचा दिया है, जो पिछले साल से 14.2% ज़्यादा है। इस भारी-भरकम खर्च का एक बड़ा कारण AI इंफ्रास्ट्रक्चर में हो रहा ज़बरदस्त निवेश है। अकेले डेटा सेंटर सिस्टम पर खर्च 2026 में 62.5% तक बढ़ने की उम्मीद है। भारतीय IT कंपनियों के लिए, ग्लोबल टेक्नोलॉजी कंपनियों द्वारा किया जा रहा यह कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capital Expenditure) AI एप्लीकेशन डेवलपमेंट, प्लेटफॉर्म मॉडर्नाइजेशन और कॉम्प्लेक्स डेटा आर्किटेक्चर के लिए कॉन्ट्रैक्ट हासिल करने का एक स्पष्ट अवसर प्रदान करता है।
ट्रांसिशन की चुनौतियां और मार्केट की हकीकत
AI-ड्रिवन ग्रोथ की लंबी अवधि की क्षमता भले ही स्पष्ट हो, लेकिन FY28 तक का रास्ता कई महत्वपूर्ण ऑपरेशनल बदलावों से होकर गुज़रेगा। इंडस्ट्री वर्तमान में पारंपरिक लेबर-बेस्ड कॉन्ट्रैक्ट्स से दूर जा रही है, जहां रेवेन्यू प्रोजेक्ट पर काम करने वाले कर्मचारियों की संख्या से जुड़ा होता था। अब फोकस ऐसे सॉल्यूशंस की ओर है जो ऑटोमेटेड AI एजेंट्स का इस्तेमाल करते हैं।
यह बदलाव अनिश्चितता का दौर पैदा करता है। निवेशक पुरानी कॉन्ट्रैक्ट्स के री-नेगोशिएशन (Re-negotiation) के दौरान रेवेन्यू में संभावित अल्पकालिक कमी पर नज़र रख सकते हैं। साथ ही, इन AI सर्विसेज को सपोर्ट करने वाले इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े हाई कॉस्ट (High Cost) की वास्तविकता भी है, जो अल्पकालिक अवधि में ऑपरेटिंग मार्जिंस (Operating Margins) पर दबाव डाल सकती है। इसके अलावा, AI को अपनाने की तेज़ रफ़्तार इस सवाल को भी उठाती है कि कंपनियां अपने वर्कफोर्स को कितनी जल्दी री-स्किल (Reskill) कर पाएंगी, ताकि वे ऐसे बाज़ार में प्रासंगिक बनी रहें जहाँ एंट्री-लेवल (Entry-level) की भूमिकाएँ लगातार ऑटोमेटेड हो रही हैं।
निवेशकों को क्या देखना चाहिए?
सेक्टर के लिए मुख्य बात इन AI-लेड स्ट्रेटेजीज़ (AI-led Strategies) का वास्तविक एग्जीक्यूशन (Execution) होगा। निवेशकों को हेडलाइन ग्रोथ नंबर्स (Headline Growth Numbers) से परे जाकर यह देखना चाहिए कि IT कंपनियां लेगेसी आउटसोर्सिंग कॉन्ट्रैक्ट्स (Legacy Outsourcing Contracts) से रेवेन्यू को कितनी प्रभावी ढंग से उच्च-मूल्य वाले AI और डेटा सर्विसेज से बदल रही हैं। ग्लोबल एंटरप्राइजेज (Global Enterprises) AI मॉडल्स की टेस्टिंग से फुल-स्केल, पेड इम्प्लीमेंटेशन (Paid Implementation) की ओर कितनी तेज़ी से बढ़ते हैं, यह इस बात का एक महत्वपूर्ण फैक्टर होगा कि इंडस्ट्री इन ग्रोथ टारगेट को पूरा कर पाएगी या नहीं। इसके अलावा, AI इंफ्रास्ट्रक्चर की लागत और इसके ओवरऑल प्रॉफिट मार्जिंस पर पड़ने वाले प्रभाव की निगरानी, इस टेक्नोलॉजिकल शिफ्ट के असली फाइनेंशियल फायदे को समझने के लिए ज़रूरी होगी।
