Nasscom का मानना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) भारतीय IT कंपनियों के लिए नौकरियों में कटौती करने के बजाय नए अवसरों का द्वार खोलेगा। यह सेक्टर अब वैश्विक ग्राहकों को AI मॉडल लागू करने में मदद करने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है, जिससे भविष्य में रेवेन्यू ग्रोथ को बढ़ावा मिलेगा।
Nasscom ने हाल ही में भारतीय टेक्नोलॉजी सर्विसेज सेक्टर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के प्रभाव को लेकर इंडस्ट्री की चिंताओं पर अपनी बात रखी है। Nasscom के वाइस प्रेसिडेंट और ग्लोबल ट्रेड डेवलपमेंट के हेड, शिवेंद्र सिंह ने कहा कि AI से सेक्टर में गिरावट आने का डर निराधार है। इसके बजाय, संगठन को उम्मीद है कि AI को अपनाना भारतीय फर्मों के लिए ग्रोथ का एक बड़ा इंजन साबित होगा, क्योंकि वे वैश्विक कंपनियों को AI मॉडल के चयन और डिप्लॉयमेंट की जटिलताओं को नेविगेट करने में मदद करेंगे।
AI इम्प्लीमेंटेशन: रेवेन्यू बढ़ाने का नया जरिया
Nasscom के अनुसार, टेक्नोलॉजी सर्विसेज प्रोवाइडर्स की भूमिका बेसिक मेंटेनेंस से आगे बढ़कर स्ट्रेटेजिक कंसल्टिंग की ओर बढ़ रही है। कंपनियां अब क्लाइंट्स को यह तय करने में मदद कर रही हैं कि कौन से AI मॉडल का उपयोग किया जाए, उन्हें कैसे स्केल किया जाए, और ऑटोमेटेड सिस्टम्स व ह्यूमन ओवरसाइट के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। यह बदलाव बताता है कि AI विशिष्ट जॉब रोल्स को बदल सकता है, लेकिन यह फर्मों के लिए AI-नेटिव बिजनेस एनवायरनमेंट में जटिल ट्रांजिशन को मैनेज करके रेवेन्यू जेनरेट करने के नए मौके पैदा करेगा। फोकस सिर्फ टेक्नोलॉजी डिप्लॉय करने के बजाय क्लाइंट्स को रिलाएबल AI वर्कफ़्लो बनाने में मदद करने पर शिफ्ट हो रहा है।
ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) की बढ़ती भूमिका
भारत के ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) भी लागत कम करने के अपने मूल उद्देश्य से आगे बढ़ रहे हैं। ये सेंटर्स, जो अब सालाना लगभग $100 बिलियन का रेवेन्यू जेनरेट करते हैं और 2.3 मिलियन प्रोफेशनल्स को रोजगार देते हैं, नवाचार के हब बन रहे हैं। डेटा सेंटर्स, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और AI-नेटिव स्टार्टअप्स में निवेश से GCCs का भारतीय टेक सेक्टर में योगदान और मजबूत होने की उम्मीद है। निवेशक अक्सर GCCs के प्रदर्शन को भारतीय IT सर्विसेज इकोसिस्टम की परिपक्वता और नवाचार क्षमताओं के प्रॉक्सी के तौर पर ट्रैक करते हैं।
वैश्विक पार्टनरशिप को मजबूत करना
घरेलू ऑपरेशंस के अलावा, Nasscom अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर जोर दे रहा है, खासकर जर्मनी के साथ। इस साझेदारी का उद्देश्य जर्मनी की एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग और इंडस्ट्री 4.0 पहलों को भारत की डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन की ताकत के साथ संरेखित करना है। इंडिया-जर्मनी AI पैक्ट और AI फॉर मिटेलस्टैंड (AI for Mittelstand) पहल में Nasscom की भागीदारी, जर्मन छोटे और मध्यम उद्यमों (SMEs) को AI अपनाने में मदद करने का एक रणनीतिक कदम है, जो भारतीय IT फर्मों के लिए नई सर्विस एक्सपोर्ट मार्केट्स खोल सकता है। सितंबर में बर्लिन, म्यूनिख, हैम्बर्ग और कोलोन जैसे शहरों में भविष्य की एंगेजमेंट प्लान्स हैं, जो इन बिजनेस अवसरों की गहराई पर अधिक स्पष्टता प्रदान कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त, Nasscom यह सुनिश्चित करने के लिए सैटेलाइट कम्युनिकेशन में प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी बढ़ाने पर लगातार जोर दे रहा है कि भारत उभरते हाई-टेक फील्ड्स में अपनी प्रतिस्पर्धी बढ़त बनाए रखे।
