ग्लोबल मार्केट में हड़कंप मचा हुआ है। Nasdaq Composite अपने अक्टूबर के ऊपरी स्तर से **10%** गिरकर तकनीकी तौर पर 'करेक्शन' (Correction) में चला गया है। इसकी मुख्य वजह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) इंफ्रास्ट्रक्चर पर हो रहे भारी-भरकम खर्च और नए रेगुलेटरी जोखिम हैं, जो भारतीय आईटी सेक्टर के लिए भी चिंता का विषय बन सकते हैं।
टेक्नोलॉजी शेयरों में जारी बिकवाली के बीच Nasdaq Composite अब आधिकारिक रूप से 'करेक्शन' की चपेट में आ गया है। 6 अक्टूबर, 2026 के अपने पीक से यह इंडेक्स 10% से ज्यादा नीचे लुढ़क चुका है। इससे पहले Nasdaq-100 इंडेक्स भी इसी सप्ताह करेक्शन की पुष्टि कर चुका है। बाजार में छाई यह सुस्ती दिखाती है कि जिस सेक्टर ने साल भर तेजी की कमान संभाल रखी थी, अब वहां निवेशकों का भरोसा डगमगा रहा है।
क्यों घबराए हैं निवेशक?
बिकवाली का सबसे बड़ा कारण AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर हो रहा बेतहाशा खर्च (Capex) है। बड़ी टेक कंपनियों ने डेटा सेंटर्स और एडवांस्ड चिप्स पर अरबों डॉलर झोंक दिए हैं। हालांकि, अब निवेशक सवाल उठा रहे हैं कि क्या ये निवेश निकट भविष्य में मुनाफा कमा कर देंगे। 'कैपेक्स बनाम रिटर्न' की इस बहस ने हाई-ग्रोथ टेक कंपनियों के वैल्यूएशन पर फिर से सोचने को मजबूर कर दिया है।
रेगुलेटरी और पॉलिटिकल संकट
अमेरिका में हालिया मिड-टर्म इलेक्शन के बाद रेगुलेटरी बदलाव का डर भी सता रहा है। आशंका है कि नई सरकार एनर्जी-हंग्री डेटा सेंटर्स के लिए कड़े नियम ला सकती है। अगर निर्माण पर पाबंदी या कड़े पर्यावरण मानक लागू होते हैं, तो AI इंडस्ट्री की रफ्तार पर ब्रेक लग सकता है।
चिप सेक्टर पर सबसे ज्यादा मार
सेमीकंडक्टर और हाई-एंड कंप्यूटिंग स्टॉक्स को सबसे ज्यादा झटका लगा है। Philadelphia Semiconductor Index में एक ही दिन में भारी गिरावट दर्ज की गई, जो यह बताने के लिए काफी है कि निवेश का वह दौर, जिसे 'अनलिमिटेड' माना जा रहा था, अब हकीकत के धरातल पर है।
भारतीय निवेशकों के लिए क्या है मतलब?
भारत के आईटी सेक्टर के लिए यह बड़ी खबर है। भारतीय आईटी सर्विसेज कंपनियों का बड़ा हिस्सा ग्लोबल क्लाइंट्स के खर्च पर निर्भर करता है। अगर ये टेक दिग्गज अपना बजट घटाते हैं, तो भारत में नए प्रोजेक्ट्स आने की रफ्तार धीमी हो सकती है। साथ ही, ग्लोबल मार्केट में ऐसी बिकवाली अक्सर भारतीय बाजारों में भी रिस्क-ऑफ (Risk-off) माहौल पैदा करती है। आने वाले दिनों में अमेरिकी कंपनियों के मैनेजमेंट की कमेंट्री और डेटा सेंटर संबंधी सरकारी अपडेट पर नजर रखना निवेशकों के लिए जरूरी होगा।
