नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) अगले दशक में अपने UPI प्लेटफॉर्म को **15-20** देशों में फैलाने की तैयारी में है। इसका मुख्य लक्ष्य भारतीय मूल के लोगों (Indian Diaspora) को टारगेट करना है। जुलाई **2026** में **23 अरब** से ज़्यादा ट्रांजैक्शन के रिकॉर्ड को पार करने के बाद, NPCI अब AI-संचालित पेमेंट इंटरफेस पर भी काम कर रहा है। हालांकि, इस ग्रोथ के साथ फ्रॉड (fraud) की बढ़ती चिंताएं और थर्ड-पार्टी ऐप पर मार्केट शेयर की लिमिट जैसे चैलेंजेस भी बने हुए हैं।
UPI का बढ़ता दबदबा, अब दुनिया भर में!
नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने एक बड़ी योजना का ऐलान किया है। कंपनी का लक्ष्य अगले 10 सालों में 15 से 20 अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपने यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) को एक पसंदीदा क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट सिस्टम के तौर पर स्थापित करना है। इस प्लान के तहत, दुनिया भर में फैले करीब 3.5 करोड़ भारतीय मूल के लोगों को टारगेट किया जाएगा, ताकि रेमिटेंस (remittances) और ट्रेड पेमेंट्स (trade payments) आसान हो सकें। फिलहाल, UPI 10 देशों में अपनी सेवाएं दे रहा है, जिनमें सिंगापुर, फ्रांस, यूएई और ग्रीस जैसे देश शामिल हैं।
टेक्नोलॉजी और ऑपरेशन में तेजी
इस ग्लोबल एक्सपेंशन (global expansion) की योजना घरेलू स्तर पर UPI की ज़बरदस्त ग्रोथ के बाद आई है। जुलाई 2026 में, UPI ने एक महीने में 23 अरब से ज़्यादा ट्रांजैक्शन का नया रिकॉर्ड बनाया। इस मोमेंटम (momentum) को बनाए रखने और इंटरनेशनल ट्रांसफर को आसान बनाने के लिए, NPCI कई स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप (strategic partnerships) कर रहा है। जून 2026 में, NPCI ने J.P. Morgan Payments के साथ मिलकर क्रॉस-बॉर्डर ट्रांजैक्शन के लिए रियल-टाइम फॉरेन एक्सचेंज (real-time foreign exchange) की सुविधा शुरू की, जिससे इंटरनेशनल मनी ट्रांसफर डोमेस्टिक ट्रांसफर जितना आसान हो जाएगा।
सिर्फ कनेक्टिविटी (connectivity) ही नहीं, NPCI पेमेंट इंटरफेस के भविष्य पर भी गहराई से काम कर रहा है। कंपनी लीडरशिप ने एजेंटिक AI (agentic AI) को इंटीग्रेट (integrate) करने में दिलचस्पी दिखाई है, जिससे भविष्य में ChatGPT या Gemini जैसे प्लेटफॉर्म से भी पेमेंट शुरू किया जा सकेगा। इस कदम का मकसद UPI को ग्लोबल डिजिटल पेमेंट इनोवेशन (global digital payment innovation) में सबसे आगे रखना है।
रेगुलेटरी और ऑपरेशनल चुनौतियाँ
जहां एक ओर एक्सपेंशन की योजनाएं बड़ी हैं, वहीं घरेलू पेमेंट इकोसिस्टम (payment ecosystem) में कुछ रेगुलेटरी (regulatory) और ऑपरेशनल बाधाएं भी हैं। निवेशकों और यूजर्स को ध्यान देना चाहिए कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और NPCI डिजिटल पेमेंट से जुड़े रिस्क (risk) को लगातार मैनेज कर रहे हैं। एक बड़ा मुद्दा थर्ड-पार्टी UPI एप्लीकेशन्स पर 30% मार्केट शेयर कैप (market share cap) का बना हुआ है। यह कैप पेमेंट प्रोवाइडर्स के बीच एक संतुलित कॉम्पिटिटिव माहौल (competitive environment) सुनिश्चित करने के लिए लगाई गई है, जिसे 31 दिसंबर, 2026 तक बढ़ा दिया गया है।
इसके अलावा, सिक्योरिटी (security) एक अहम फोकस एरिया है। जैसे-जैसे ट्रांजैक्शन वॉल्यूम (transaction volume) बढ़ रहा है, इंडस्ट्री UPI से जुड़े फ्रॉड (fraud) और स्कैम (scams) के बढ़ते मामलों से जूझ रही है। सिस्टम को ग्लोबली सफल बनाने के लिए, मजबूत सिक्योरिटी प्रोटोकॉल (security protocols) के ज़रिए यूजर का भरोसा बनाए रखना ज़रूरी होगा। साथ ही, सिस्टम का बिना रुकावट इंटरनेट कनेक्टिविटी पर निर्भर रहना, नए इंटरनेशनल मार्केट में इंफ्रास्ट्रक्चर की विश्वसनीयता (infrastructure reliability) को एडॉप्शन (adoption) के लिए एक की-फैक्टर (key factor) बनाता है।
NPCI का अगला कदम जापान, मलेशिया और बहरीन जैसे टारगेटेड रीजन्स (regions) में जियो-पॉलिटिकल (geopolitical) और रेगुलेटरी परिदृश्य (regulatory landscapes) को नेविगेट करना है। स्टेकहोल्डर्स (stakeholders) क्रॉस-बॉर्डर एडॉप्शन रेट (adoption rates) और संभावित ट्रांजैक्शन चार्जेज (transaction charges) से जुड़ी किसी भी पॉलिसी (policy) में बदलाव पर नज़र रखेंगे, जिन पर अधिकारियों द्वारा चर्चा की गई है लेकिन अभी तक उन्हें अंतिम रूप नहीं दिया गया है।
