नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) डिजिटल पेमेंट्स को और भी आसान बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाने पर विचार कर रहा है। NPCI 'UPI One-Click' नाम का एक नया फ्रेमवर्क ला सकता है, जिससे यूजर्स हर बार पेमेंट ऐप चुनने की बजाय एक डिफ़ॉल्ट ऐप सेट कर सकेंगे। हालांकि, इस कदम से Paytm और CRED जैसी फिनटेक कंपनियों की चिंताएं बढ़ गई हैं, जिन्हें डर है कि इससे मार्केट में प्रतिस्पर्धा कम हो सकती है।
क्या है 'UPI One-Click' का प्लान?
NPCI की इस नई पहल, जिसे 'UPI Meta' भी कहा जा रहा है, का मकसद डिजिटल पेमेंट्स के अनुभव को स्मूथ बनाना है। अभी तक UPI ट्रांजैक्शन के लिए हर बार यूजर्स को पेमेंट ऐप चुनना पड़ता है। लेकिन 'UPI One-Click' के आने के बाद, यूजर अपनी पसंद का एक ऐप डिफ़ॉल्ट के तौर पर सेट कर पाएंगे। इससे पेमेंट प्रोसेस में लगने वाला समय बचेगा और यूजर्स को सुविधा मिलेगी।
क्यों चिंतित हैं फिनटेक कंपनियां?
यह प्रस्ताव फिनटेक इंडस्ट्री में चर्चा का विषय बन गया है। कई फिनटेक कंपनियों, जिनमें Paytm, BharatPe, CRED, Navi, Kiwi, FamPay और Super.money शामिल हैं, ने NPCI को लिखे एक पत्र में अपनी चिंताएं जताई हैं। उनका तर्क है कि UPI ट्रांजैक्शन मार्केट पहले से ही कुछ बड़ी कंपनियों के दबदबे में है। मौजूदा आंकड़ों के अनुसार, PhonePe और Google Pay मिलकर लगभग 80% UPI ट्रांजैक्शन वॉल्यूम पर कब्जा रखते हैं।
फिनटेक कंपनियों का डर है कि 'डिफ़ॉल्ट' सेटिंग वाला सिस्टम इन बड़ी कंपनियों को और मजबूत कर सकता है। ऐसा इसलिए, क्योंकि व्यवहारिक अर्थशास्त्र (Behavioral economics) के अनुसार, एक बार सेट की गई डिफ़ॉल्ट सेटिंग को यूजर्स अक्सर बदलते नहीं हैं। अगर यूजर्स किसी एक प्रमुख प्लेटफॉर्म को अपना डिफ़ॉल्ट बना लेते हैं, तो छोटी फिनटेक कंपनियों के लिए नए ग्राहक जोड़ना या मौजूदा ग्राहकों को बनाए रखना बेहद मुश्किल हो जाएगा। इससे मार्केट में छोटी कंपनियों का टिकना और भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
आगे क्या?
फिलहाल, यह प्रस्ताव अभी इंडस्ट्री के बीच चर्चा और रेगुलेटरी कंसल्टेशन के दौर से गुजर रहा है। NPCI को यह तय करना है कि वह पेमेंट को तेज बनाने की सुविधा और एक निष्पक्ष, प्रतिस्पर्धी इकोसिस्टम की जरूरत के बीच कैसे संतुलन बनाएगा। 12 अगस्त 2026 तक इस पर कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है। यह देखना अहम होगा कि NPCI इन चिंताओं पर क्या रुख अपनाता है।
