National Payments Corporation of India (NPCI) ने UPI के काम-काज को ऑटोमेट करने के लिए दो नए AI-आधारित प्लेटफॉर्म, AiNxt और AtOM पेश किए हैं। अब 24.5 बिलियन से ज्यादा मासिक ट्रांजेक्शन वाले इस नेटवर्क में बैंकों और पेमेंट प्रोवाइडर्स के लिए ऑनबोर्डिंग और प्रोसेसिंग पहले से कहीं ज्यादा आसान और तेज होगी।
मुंबई में आयोजित Global Fintech Fest 2026 के दौरान NPCI ने दो नए AI-फोक्स्ड प्लेटफॉर्म—AiNxt और AtOM—को दुनिया के सामने रखा है। इन टूल्स का मुख्य उद्देश्य UPI की बढ़ती जटिलता को मैनेज करना है, जो हर महीने 24.5 बिलियन से अधिक ट्रांजेक्शन प्रोसेस कर रहा है।
ऑटोमेशन से बदलेगी UPI की सूरत
UPI इकोसिस्टम में बैंकों और मर्चेंट्स को जोड़ने की प्रक्रिया अभी काफी मैनुअल है, जिसमें समय और मेहनत बहुत ज्यादा लगती है। AtOM (Agentic Orchestration and Messaging) इसी समस्या का समाधान है। यह प्लेटफॉर्म मैनुअल कामों को हटाकर पूरी तरह से डिजिटल और ऑडिबल वर्कफ्लो पर जोर देता है। JSON-RPC 2.0 का उपयोग करके, NPCI ट्रांजेक्शन से जुड़े लाइफसाइकिल प्रोसेस को स्टैंडर्डाइज कर रहा है, जिससे नए फीचर्स को लॉन्च करने में लगने वाला समय काफी कम हो जाएगा।
AiNxt से AI एजेंट्स का नया दौर
जहाँ AtOM ऑपरेशन्स पर फोकस करता है, वहीं AiNxt संस्थानों को अपने खुद के AI एजेंट्स बनाने की आज़ादी देता है। यह एक 'ब्रिंग-योर-ओन-मॉडल' (BYOM) फ्रेमवर्क है, जो बैंकों को अपनी जरूरत के हिसाब से AI मॉडल चुनने की छूट देता है। इसमें AiNxt OS और Command Line Interface (CLI) जैसे फीचर्स दिए गए हैं, जो नो-कोड से लेकर जटिल कोडिंग तक के सॉल्यूशंस को सपोर्ट करते हैं।
रिस्क और रेगुलेटरी चिंताएं
हालांकि यह ऑटोमेशन बैंकों और फिनटेक कंपनियों की ऑपरेशनल कॉस्ट को कम करने में मदद करेगा, लेकिन यह कुछ नई चुनौतियां भी लाया है। सबसे बड़ी चिंता 'लायबिलिटी' (Liability) की है। अगर AI एजेंट से ट्रांजेक्शन में गलती होती है, धोखाधड़ी होती है या सिस्टम फेल होता है, तो उसकी जवाबदेही किसकी होगी—यूजर की, बैंक की या AI प्रोवाइडर की? बाजार के जानकारों का मानना है कि इन टूल्स के सफल होने के लिए डेटा प्राइवेसी और सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन करना NPCI के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी।
