NITI Aayog की बड़ी मांग: टेलीकॉम सेक्टर में सुधार, इम्पोर्ट पर निर्भरता घटाने की ज़रूरत

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AuthorNeha Patil|Published at:
NITI Aayog की बड़ी मांग: टेलीकॉम सेक्टर में सुधार, इम्पोर्ट पर निर्भरता घटाने की ज़रूरत

NITI Aayog की एक नई रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि भारत का टेलीकॉम इक्विपमेंट सेक्टर चीन से होने वाले इम्पोर्ट पर बहुत ज़्यादा निर्भर है, जिससे अरबों डॉलर का ट्रेड डेफिसिट (Trade Deficit) पैदा हो रहा है। इस समस्या को ठीक करने के लिए, रिपोर्ट ने सरकार से स्थानीय निर्माताओं के सामने मौजूद **26-29%** की कॉस्ट डिसएडवांटेज (Cost Disadvantage) को दूर करने की अपील की है। निवेशक उन नीतिगत बदलावों पर नज़र रख रहे हैं जो इस सेक्टर को **$25 अरब** से बढ़ाकर **$50 अरब** (FY32 तक) करने में मदद कर सकते हैं।

NITI Aayog की अहम रिपोर्ट

NITI Aayog ने 13 अगस्त, 2026 को 'Key Sectors to Position India as a Global Manufacturing Hub' नाम से एक रिपोर्ट जारी की है। इसमें भारत के टेलीकॉम और नेटवर्क इक्विपमेंट (TANE) सेक्टर में बड़े संरचनात्मक बदलावों की तत्काल ज़रूरत पर ज़ोर दिया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत सालाना $4-5 अरब का इक्विपमेंट इम्पोर्ट करता है, जबकि केवल $0.6-1 अरब का एक्सपोर्ट (Export) करता है। यह बड़ा ट्रेड इम्बैलेंस (Trade Imbalance) चीन पर भारी निर्भरता के कारण है, जो 4G और 5G एंटेना और सिग्नल प्रोसेसर जैसे महत्वपूर्ण कंपोनेंट्स का 80% से ज़्यादा सप्लाई करता है।

कॉस्ट डिसएडवांटेज की बड़ी चुनौती

भारतीय निवेशकों के लिए, रिपोर्ट का सबसे अहम खुलासा यह है कि घरेलू निर्माताओं को 'फिस्कल डिसेबिलिटी' यानी कॉस्ट डिसएडवांटेज का सामना करना पड़ रहा है। भारतीय कंपनियां वैश्विक कंपनियों की तुलना में 26-29% ज़्यादा कॉस्ट पर काम कर रही हैं। यह गैप, जो कम इकोनॉमीज़ ऑफ स्केल (Economies of Scale) और इनपुट कॉस्ट (Input Cost) ज़्यादा होने जैसे कारणों से है, भारतीय फर्मों के लिए घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में कीमत के आधार पर कॉम्पिटिशन (Competition) करना मुश्किल बना देता है। बिना सरकारी मदद के, यह कॉस्ट प्रेशर प्रॉफिट मार्जिन (Profit Margin) को सीमित करता है, जिससे कई निर्माता रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) में ज़्यादा निवेश नहीं कर पाते।

मार्केट ग्रोथ और स्ट्रक्चरल अड़चनें

मौजूदा समय में, घरेलू टेलीकॉम इक्विपमेंट मार्केट का मूल्य लगभग $25 अरब है और इसके FY32 तक $50 अरब तक पहुंचने का अनुमान है। 5G की लॉन्चिंग और डेटा की बढ़ती खपत से मांग को मज़बूती मिल रही है, लेकिन इसका पूरा फायदा स्थानीय निर्माताओं तक नहीं पहुंच रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि प्राइवेट टेलीकॉम ऑपरेटर्स, जो लगभग 98% इक्विपमेंट खरीदते हैं, अक्सर स्थापित ग्लोबल ओरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर्स (OEMs) को प्राथमिकता देते हैं। इसके चलते, ज़्यादातर स्थानीय काम सिर्फ़ असेंबली (Assembly) तक ही सीमित है, और डोमेस्टिक वैल्यू एडिशन (Domestic Value Addition) अक्सर 15% से नीचे रहता है।

निवेशकों को क्या देखना चाहिए?

NITI Aayog की रिपोर्ट सुझाव देती है कि नेशनल टेलीकॉम पॉलिसी 2025 के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए, सरकार को सिर्फ़ सामान्य प्रोत्साहन (Incentives) से आगे बढ़ना होगा। इसमें टेक्नोलॉजी ट्रांसफर (Technology Transfer) के लिए जॉइंट वेंचर्स (Joint Ventures) को बढ़ावा देना, इंडस्ट्रियल क्लस्टर्स (Industrial Clusters) विकसित करना और सबसे महत्वपूर्ण, प्राइवेट सर्विस प्रोवाइडर्स (Service Providers) को स्थानीय स्तर पर ज़्यादा इक्विपमेंट खरीदने के लिए प्रेरित करना शामिल है।

इस सेक्टर की कंपनियों पर नज़र रखने वाले निवेशकों को तीन मुख्य बातों पर ध्यान देना चाहिए: पहला, सरकार द्वारा टेलीकॉम हार्डवेयर (Hardware) की डोमेस्टिक खरीद को अनिवार्य या प्रोत्साहित करने के कदम। दूसरा, हाई-वैल्यू कंपोनेंट्स (High-Value Components) के स्थानीय निर्माण में प्रगति, जो लो-वैल्यू असेंबली से एक बदलाव का संकेत देगी। तीसरा, स्वतंत्र टेस्टिंग और सर्टिफिकेशन इंफ्रास्ट्रक्चर (Testing & Certification Infrastructure) का विकास, जो विदेशी टेस्टिंग मानकों पर वर्तमान निर्भरता को कम करने के लिए ज़रूरी है। इन कदमों को सेक्टर की सप्लाई चेन (Supply Chain) की कमजोरी को कम करने और घरेलू टेलीकॉम इक्विपमेंट निर्माताओं की लॉन्ग-टर्म प्रॉफिटेबिलिटी (Long-term Profitability) को बेहतर बनाने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.