NIT Warangal के शोधकर्ताओं ने एक नया एनर्जी-एफिशिएंट माइक्रोचिप तैयार किया है, जो IoT गैजेट्स में बैटरी की खपत को कम करेगा। सरकार की 'Chips to Startup' स्कीम के तहत विकसित यह स्वदेशी डिज़ाइन अब लैब से कमर्शियल प्रोडक्शन की ओर बढ़ रहा है।
नई तकनीक का दम
NIT Warangal के शोधकर्ताओं ने सेमीकंडक्टर डिजाइन में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। स्मार्ट डिवाइसेज में बैटरी जल्दी खत्म होने की समस्या को देखते हुए, उन्होंने एक Power Management Integrated Circuit (PMIC) बनाया है। यह चिप स्टैंडबाय मोड में ऊर्जा की बर्बादी को रोकता है, जिससे गैजेट्स की बैटरी लाइफ में सुधार होगा।
इस प्रोजेक्ट को पीएचडी स्कॉलर Kaira Anupama और Jayaram Chilaka की टीम ने लीड किया है। इस चिप में Low Drop-Out (LDO) रेगुलेटर और इंटीग्रेटेड टेम्परेचर सेंसर का इस्तेमाल किया गया है, ताकि यह डिवाइस के तापमान को मॉनिटर करते हुए स्थिर बना रहे। खास बात यह है कि इस रिसर्च का पूरा खर्च केवल ₹4 लाख के आसपास रहा है और इसे 3 साल की कड़ी मेहनत से तैयार किया गया है।
सरकारी सपोर्ट और भविष्य की राह
यह खोज भारत के सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम के लिए अहम है। इसे Ministry of Electronics and Information Technology (MeitY) की 'Chips to Startup' (C2S) पहल के तहत फंडिंग और रणनीतिक सपोर्ट मिला है। सरकार का मकसद आयात पर निर्भरता कम कर देश में ही चिप डिजाइनिंग को बढ़ावा देना है।
फिलहाल, यह डिज़ाइन लैब टेस्टिंग के चरण में है। इसे मास-मार्केट तक पहुँचाने के लिए शोधकर्ता अब इंडस्ट्रियल पार्टनर और एक्सटर्नल फंडिंग की तलाश कर रहे हैं। जानकारों का अनुमान है कि अगर मैन्युफैक्चरिंग स्केल बढ़ती है, तो एक यूनिट की लागत ₹50 से ₹60 के बीच रह सकती है। आने वाले समय में पेटेंट और प्राइवेट कंपनियों के साथ तालमेल ही इसकी सफलता तय करेगा।
