Myntra, जो Walmart के मालिकाना हक वाली एक प्रमुख फैशन ई-कॉमर्स कंपनी है, ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल करके अपने कामकाज में क्रांति ला दी है। AI टूल्स के ज़रिए, कंपनी ने नए सेलर्स को जोड़ने की प्रक्रिया को हफ्तों से घटाकर सिर्फ **2 दिन** कर दिया है। साथ ही, AI अब प्रोडक्ट कैटलॉग बनाने और ग्राहकों को पर्सनलाइज्ड शॉपिंग अनुभव देने में भी मदद कर रहा है।
ऑपरेशनल एफिशिएंसी में भारी सुधार
AI टूल्स का सबसे बड़ा असर कंपनी के सेलर इकोसिस्टम पर देखने को मिल रहा है। कई एडमिनिस्ट्रेटिव कामों को ऑटोमेट करके, Myntra ने नए सेलर्स को ऑनबोर्ड करने में लगने वाले 10 से 15 दिनों के समय को घटाकर महज़ 1 से 2 दिन कर दिया है। इसी तरह, प्रोडक्ट कैटलॉग तैयार करने में लगने वाला पूरा दिन घटकर अब लगभग 4 घंटे रह गया है। फैशन रिटेल में यह तेज़ी बेहद ज़रूरी है, क्योंकि नए ट्रेंड्स तेज़ी से आते हैं और ग्राहकों का ध्यान खींचने के लिए उन्हें तुरंत लिस्ट करने की ज़रूरत होती है।
आंतरिक तौर पर, कंपनी ने नए प्लेटफॉर्म फीचर्स को रोल आउट करने की स्पीड में 40% की वृद्धि दर्ज की है। पहले 2 दिन लगने वाले जटिल सप्लाई चेन सिमुलेशन अब लगभग 1 घंटे में पूरे हो जाते हैं। इस एफिशिएंसी के दम पर कंपनी ज़्यादा डेटा और ऑपरेशंस को संभाल सकती है, बिना मैन्युअल काम को बहुत ज़्यादा बढ़ाए।
ग्राहक अनुभव और पर्सनलाइजेशन
ग्राहकों के लिए, AI का इस्तेमाल शॉपिंग को ज़्यादा सहज बनाने के लिए किया जा रहा है। वर्तमान में, 90% मंथली एक्टिव यूज़र्स को उनकी पसंद के अनुसार पर्सनलाइज्ड सर्च रिजल्ट्स मिलते हैं। कंपनी का साइज़ रिकमेन्डेशन इंजन अब 85% योग्य कपड़ों को कवर करता है, जिससे ग्राहकों को सही फिट चुनने में मदद मिलती है और रिटर्न कम होते हैं। इसके अलावा, प्लेटफॉर्म का कन्वर्सेशनल AI असिस्टेंट 'मीरा' (Meera) 30% से ज़्यादा रूटीन कस्टमर सर्विस पूछताछ को संभाल रहा है, जिससे ह्यूमन सपोर्ट स्टाफ ज़्यादा जटिल मुद्दों पर ध्यान केंद्रित कर सकता है।
स्ट्रैटेजिक बिज़नेस कॉन्टेक्स्ट
Myntra भारत के बड़े ई-कॉमर्स मार्केट का हिस्सा है, जो प्रतिस्पर्धा में बने रहने के लिए जेनरेटिव AI को तेजी से अपना रहा है। जहां ये टूल्स प्रोडक्टिविटी में स्पष्ट लाभ दे रहे हैं, वहीं कंपनी के सामने स्केल करते हुए हाई-क्वालिटी कैटलॉग स्टैंडर्ड बनाए रखने की चुनौती है। कंपनी वर्तमान में अपने AI इंफ्रास्ट्रक्चर का उपयोग करके प्रतिदिन 400 से 600 प्रोडक्ट वीडियो बना रही है।
निवेशक इस बात पर नज़र रख सकते हैं कि ये तकनीकी निवेश समय के साथ बेहतर प्रॉफिट मार्जिन में कैसे तब्दील होते हैं, क्योंकि ऑनबोर्डिंग समय कम करने और कस्टमर सपोर्ट को ऑटोमेट करने से ऑपरेशनल लागत कम हो सकती है। हालांकि, इन टूल्स की अंतिम सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि वे बिक्री रूपांतरण को लगातार कैसे बेहतर बनाते हैं और भारतीय ऑनलाइन फैशन मार्केट के सामान्य हाई लॉजिस्टिक्स और रिटर्न लागत को कैसे कम करते हैं। कंपनी का कहना है कि डेटा प्राइवेसी और कंप्लायंस मानकों को पूरा करने के लिए सभी AI डिप्लॉयमेंट ह्यूमन ओवरसाइट और गवर्नेंस प्रोटोकॉल के तहत किए जाते हैं।
