IT Stocks: म्यूचुअल फंड ने बढ़ाई हिस्सेदारी, जुलाई की तेजी के बाद अब इन शेयरों पर दांव

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
IT Stocks: म्यूचुअल फंड ने बढ़ाई हिस्सेदारी, जुलाई की तेजी के बाद अब इन शेयरों पर दांव

भारतीय म्यूचुअल फंड (Mutual Funds) अब आईटी (IT) शेयरों में अपनी हिस्सेदारी धीरे-धीरे बढ़ा रहे हैं। जुलाई में निफ्टी आईटी इंडेक्स (Nifty IT Index) में **19%** की बड़ी उछाल के बाद यह बदलाव देखने को मिला है। फंड मैनेजर KPIT Technologies और LTIMindtree जैसी कंपनियों में सावधानी से निवेश कर रहे हैं, लेकिन वे इस बात पर भी नज़र रखे हुए हैं कि AI पर होने वाले खर्च का मुनाफा मार्जिन पर क्या असर पड़ेगा।

सेंटीमेंट में क्यों आ रहा है बदलाव?

साल 2026 की पहली छमाही में ज्यादातर निवेशक AI को भारतीय आईटी सर्विसेज के लिए बड़ा खतरा मान रहे थे। लेकिन अब यह सोच बदल गई है। फंड मैनेजर AI को एक बड़े खतरे के बजाय बदलाव का दौर मान रहे हैं। हालांकि क्लाइंट्स AI से तुरंत फायदा पाने के लिए कीमतें कम करने पर जोर दे रहे हैं, लेकिन इंडस्ट्री इस नई हकीकत के साथ तालमेल बिठा रही है। निवेशक अब इन चुनौतियों का सामना आराम भरी वैल्यूएशन्स के साथ कर रहे हैं, क्योंकि यह सेक्टर फिलहाल अपने पांच साल के औसत फॉरवर्ड प्राइस-टू-अर्निंग्स रेशियो (P/E ratio) से कम पर ट्रेड कर रहा है।

टेक स्टॉक्स में खरीदारी

जुलाई के आंकड़ों के मुताबिक, म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री ने आईटी सेक्टर में अपना आवंटन बढ़ाकर 6.6% कर दिया है, जो जून में 5.9% के निचले स्तर से ऊपर है। हालांकि, यह अभी भी जुलाई 2025 में दर्ज 8% के आवंटन स्तर से कम है, लेकिन यह रणनीति में बदलाव का संकेत देता है। फंड्स ने KPIT Technologies और LTIMindtree जैसी कंपनियों में नेट खरीदारी दिखाई है। इसके अलावा Sagility, Mastek और Tata Elxsi जैसी कंपनियों में भी इस महीने म्यूचुअल फंड मैनेजर्स की रुचि बढ़ी है।

आगे क्या हैं जोखिम?

हालिया रिकवरी के बावजूद, फंड मैनेजर भविष्य को लेकर सतर्क हैं। सबसे बड़ी चुनौती यह है कि AI कॉन्ट्रैक्ट्स की अवधि अक्सर छोटी होती है, जिसके लिए ग्रोथ बनाए रखने के लिए लगातार नए डील जीतने की जरूरत पड़ती है। इसके अलावा, प्रमुख पश्चिमी बाजारों में मैक्रोइकॉनॉमिक और भू-राजनीतिक कारकों के कारण खर्चों पर अनिश्चितता बनी हुई है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि कीमतों पर दबाव अभी भी एक हकीकत है, कुछ अनुमानों के मुताबिक क्लाइंट्स अपने टेक वेंडर्स से तुरंत लागत बचत की तलाश में हैं, जिससे रेवेन्यू पर 2-3% का असर पड़ सकता है।

आईटी सेक्टर का अमेरिकी डॉलर-आधारित रेवेन्यू पर निर्भरता का मतलब यह भी है कि करेंसी में उतार-चढ़ाव आय को प्रभावित करता रहेगा। आगे चलकर, निवेशकों के लिए अगली तिमाही की आय रिपोर्ट और डील पाइपलाइन की स्थिति पर मैनेजमेंट की टिप्पणी महत्वपूर्ण होगी। निवेशक यह ट्रैक कर सकते हैं कि जैसे-जैसे AI को अपनाने की प्रक्रिया ग्राहकों के बिजनेस में फैल रही है, आईटी फर्में वर्तमान डिफ्लेशनरी फेज से उच्च वॉल्यूम ग्रोथ की ओर सफलतापूर्वक बढ़ पाती हैं या नहीं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.