WordPress के लाखों यूज़र्स पर साइबर अटैक का खतरा मंडरा रहा है। नए सिक्योरिटी फ्लॉज़ (Security Flaws) के चलते वेबसाइट्स हैक हो सकती हैं। कंपनी ऑटोमेटिक अपडेट्स ज़रूर भेज रही है, लेकिन फिर भी लाखों साइट्स अब भी ख़तरे में हैं।
लाखों WordPress वेबसाइट्स पर हैकिंग का खतरा
WordPress चलाने वाली लाखों वेबसाइट्स इस समय गंभीर सुरक्षा खतरों का सामना कर रही हैं। हाल ही में दो बड़ी सिक्योरिटी खामियां (Security Vulnerabilities) पाई गई हैं, जिनके चलते हैकर्स इन साइट्स में सेंध लगा सकते हैं। जिन सॉफ्टवेयर वर्ज़न्स में ये दिक्कतें हैं, उनमें 6.9.0 से लेकर 6.9.4 और 7.0.0 से लेकर 7.0.1 शामिल हैं। साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स का कहना है कि हैकर्स इन फ्लॉज़ का गलत फायदा उठाकर वेबसाइट्स पर अनधिकृत (Unauthorized) एक्सेस पा रहे हैं।
कितना बड़ा है खतरा?
यह खतरा इसलिए भी गंभीर है क्योंकि दुनिया भर की एक बड़ी आबादी WordPress का इस्तेमाल करती है। अभी के आंकड़ों के अनुसार, 400 मिलियन से ज़्यादा वेबसाइट्स इन वर्ज़न्स का इस्तेमाल कर रही हैं। एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि इनमें से करीब 15% साइट्स पर अब भी ये पैच (Patch) अपडेट नहीं किए गए हैं। इसका मतलब है कि दुनिया भर में करोड़ों वेबसाइट्स पूरी तरह से हैकर्स के कंट्रोल में आ सकती हैं, अगर उनके एडमिनिस्ट्रेटर्स ने तुरंत ज़रूरी अपडेट्स न किए।
WP2Shell का डर
सिक्योरिटी रिसर्चर Adam Kues ने एक ख़ास बग, जिसे WP2Shell नाम दिया गया है, का पता लगाया है। इस बग का इस्तेमाल अगर किसी दूसरी खामी के साथ किया जाए, तो हैकर्स वेबसाइट की सुरक्षा को भेदकर उस पर पूरा कंट्रोल हासिल कर सकते हैं। ऐसे में, जिन बिज़नेस और ई-कॉमर्स साइट्स का डेटा कस्टमर्स के लिए ज़रूरी है, उनके लिए यह डेटा चोरी, सर्विस बंद होने और कंपनी की इमेज खराब होने का बड़ा कारण बन सकता है।
ऑटोमेटिक अपडेट्स और आगे की राह
WordPress ने ऑटोमेटिक अपडेट्स भेजने का काम शुरू कर दिया है, और Cloudflare जैसी थर्ड-पार्टी सिक्योरिटी सर्विस भी हमलों को रोकने के लिए कदम उठा रही हैं। इन उपायों से कई यूज़र्स का बचाव हो रहा है। हालांकि, जिन वेबसाइट्स को इंडिपेंडेंट सर्वर पर होस्ट किया गया है और जहां ऑटोमेटिक मैनेजमेंट नहीं है, वहां वेबसाइट मालिकों को खुद ही सॉफ्टवेयर अपडेट करने की ज़रूरत है। मुख्य चिंता यह है कि अगर बड़े पैमाने पर हैकिंग हुई, तो डिजिटल कॉमर्स, इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी और डेटा प्राइवेसी को लेकर रेगुलेटरी जांच बढ़ सकती है। इन्वेस्टर्स और बिज़नेस ओनर्स को यह पक्का करना चाहिए कि उनकी टीम ने लेटेस्ट और सिक्योर वर्ज़न्स को इंस्टॉल कर लिया है, ताकि काम-काज में कोई रुकावट न आए।
