ब्रोकरेज फर्म Anand Rathi ने भारत के मिडकैप IT सेक्टर को लेकर सतर्क रुख अपनाया है। FY27 के लिए कंपनी का मानना है कि धीमी ग्रोथ और बढ़ते खर्चे इस सेक्टर को प्रभावित करेंगे। हालिया Q1FY27 के आंकड़े रेवेन्यू ग्रोथ और ऑपरेटिंग मार्जिन में गिरावट दर्शाते हैं।
Anand Rathi की मिडकैप IT पर राय
Anand Rathi Shares and Stock Brokers ने भारत के मिडकैप IT सेक्टर के लिए मौजूदा फाइनेंशियल ईयर को लेकर चिंता जताई है। ब्रोकरेज फर्म का मानना है कि इस सेक्टर की कंपनियों को प्रोजेक्ट शुरू होने में देरी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसे नए टूल्स से लागत में बढ़ोतरी जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा, जिससे रेवेन्यू ग्रोथ धीमी रह सकती है।
Q1FY27 के आंकड़े क्या कहते हैं?
FY27 की पहली तिमाही के नतीजे सेक्टर की मौजूदा मुश्किलों को उजागर करते हैं। मिडकैप IT कंपनियों के लिए औसत रेवेन्यू ग्रोथ पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले घटकर 2.1% रह गई, जो FY26 की आखिरी तिमाही में 3.8% थी। इसके अलावा, ऑपरेटिंग प्रॉफिट मार्जिन भी घटकर 14.7% पर आ गए, जो पिछली तिमाही में 15.9% थे।
इस मुनाफे पर दबाव के कई कारण हैं। कंपनियों को फॉरेन करेंसी एक्सचेंज रेट में उतार-चढ़ाव और हेजिंग की लागत से नुकसान हुआ। साथ ही, कई कंपनियों ने ज्यादा मांग की उम्मीद में हायरिंग बढ़ाई थी, जो उम्मीद के मुताबिक नहीं रही, इससे स्टाफिंग कॉस्ट बढ़ गई जिसे रेवेन्यू ग्रोथ से पूरा नहीं किया जा सका।
कंपनियों का मिला-जुला प्रदर्शन
जहां सेक्टर का औसत प्रदर्शन कमजोर है, वहीं कुछ कंपनियों ने मजबूत डील मोमेंटम बनाए रखा है। Persistent Systems ने $1.15 बिलियन का रिकॉर्ड तिमाही टोटल कॉन्ट्रैक्ट वैल्यू दर्ज किया। हालांकि, इतनी बड़ी डील के बावजूद, कंपनी का नेट प्रॉफिट पिछली तिमाही की तुलना में 8.7% गिर गया, जिसका मुख्य कारण फॉरेन एक्सचेंज मूवमेंट से हुआ नुकसान था। Mphasis ने लगातार पांचवीं तिमाही में $400 मिलियन से अधिक की कॉन्ट्रैक्ट जीत दर्ज की है।
दूसरी ओर, सेक्टर कुछ खास क्षेत्रों और इंडस्ट्री में कमजोरी का सामना कर रहा है। मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक अस्थिरता ने उस क्षेत्र में खर्च को प्रभावित किया है। इसके अलावा, ऑटोमोटिव-केंद्रित इंजीनियरिंग सेगमेंट में भी मंदी देखी गई है, जिसमें KPIT जैसी कंपनियों ने यूरोपीय वाहन निर्माताओं के बीच प्रोग्राम में देरी के कारण रेवेन्यू में गिरावट दर्ज की है।
निवेशकों के लिए आगे का रास्ता
Firstsource जैसी बिजनेस प्रोसेस आउटसोर्सिंग (BPO) फर्मों ने अधिक स्थिरता दिखाई है और अपनी रेवेन्यू ग्रोथ गाइडेंस को बनाए रखा है। हालांकि, व्यापक मिडकैप IT सेक्टर के लिए, इस फाइनेंशियल ईयर के बाकी समय में साइन किए गए कॉन्ट्रैक्ट्स को वास्तविक रेवेन्यू में बदलना मुख्य चुनौती होगी। निवेशक यह देखने की उम्मीद कर रहे हैं कि ये कंपनियां अपने क्लाइंट्स द्वारा AI और डेटा सेंटर बजट बढ़ाने के बीच लागतों को प्रभावी ढंग से कैसे प्रबंधित करती हैं और अपनी टेक्नोलॉजी सेवाओं को सफलतापूर्वक कैसे लागू करती हैं।
शेयरधारकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह होगी कि कंपनियां आने वाली तिमाहियों में अपने मार्जिन रिकवरी को कैसे प्रबंधित करती हैं, खासकर जब वे नई टेक्नोलॉजी में निवेश की आवश्यकता और मुनाफे को बनाए रखने के दबाव के बीच संतुलन बना रही हैं। यह देखना बाकी है कि ये फर्म अपनी एग्जीक्यूशन स्पीड को सुधार पाती हैं या नहीं और मौजूदा प्राइसिंग माहौल से कैसे निपट पाती हैं।
