Coforge, Cyient और Persistent Systems जैसी मिड-कैप IT कंपनियां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए विदेशी छोटी टेक कंपनियों को भारी कीमत पर खरीद रही हैं। ये सौदे उन्हें बड़े AI प्रोजेक्ट्स हासिल करने में मदद कर सकते हैं, लेकिन निवेशकों को कंपनी के इंटीग्रेशन और मुनाफे पर बारीकी से नजर रखनी होगी।
क्या हुआ है?
भारतीय मिड-कैप IT कंपनियां अपनी ग्रोथ की रणनीति में बड़ा बदलाव कर रही हैं। अब ये कंपनियां सिर्फ पुराने सर्विस मॉडल पर निर्भर रहने की बजाय, Coforge, Cyient और Persistent Systems जैसी फर्म्स आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डेटा इंजीनियरिंग और क्लाउड सेवाओं में अपनी काबिलियत को तेजी से बढ़ाने के लिए ग्लोबल स्पेशलिस्ट टेक कंपनियों को खरीदने पर बड़ा दांव लगा रही हैं। यह दिखाता है कि छोटी कंपनियां अब केवल लागत-प्रभावी आउटसोर्सिंग के काम के बजाय, हाई-वैल्यू AI कॉन्ट्रैक्ट्स के लिए प्रतिस्पर्धा करना चाहती हैं।
नई रणनीति का असर
Coforge ने इस दिशा में सबसे बड़ा कदम उठाया है। अप्रैल 2026 में, कंपनी ने कैलिफोर्निया की Encora को लगभग 2.35 बिलियन डॉलर में खरीदने का सौदा फाइनल किया। कंपनी को उम्मीद है कि इस बड़े निवेश से उसे फाइनेंशियल ईयर 2027 तक AI-इंजीनियरिंग, डेटा और क्लाउड सेवाओं से 2 बिलियन डॉलर का रेवेन्यू हासिल करने में मदद मिलेगी।
इसी तरह, Cyient ने मई 2026 में कैलिफोर्निया की TAO Digital Solutions को 218 मिलियन डॉलर में खरीदा। इस सौदे का मकसद डेटा इंजीनियरिंग और AI-आधारित प्लेटफॉर्म सेवाओं में अपनी कमी को पूरा करना है। वहीं, Persistent Systems ने यूरोप में कदम बढ़ाते हुए एस्टोनिया की Concise Systems का अधिग्रहण किया है। यह खरीद छोटी है, लेकिन क्लाउड-नेटिव टेक्नोलॉजीज और AI प्रोडक्ट इंजीनियरिंग में कंपनी की मौजूदगी को मजबूत करेगी।
वित्तीय पहलू और जोखिम
इन अधिग्रहणों से नई तकनीक तो मिल रही है, लेकिन निवेशकों को कुछ वित्तीय सच्चाइयों पर भी गौर करना होगा। मार्च 2026 की तिमाही में, Cyient का नेट प्रॉफिट पिछले साल की तुलना में 65% घटकर ₹65.5 करोड़ रह गया। इसका मुख्य कारण काइनेटिक टेक्नोलॉजीज से जुड़े कानूनी मामले की वजह से ₹71.2 करोड़ का एकमुश्त चार्ज था। हालांकि, यह एक बार का खर्च कंपनी के लंबे समय के प्रदर्शन को नहीं दर्शाता, यह ग्लोबल ऑपरेशन और कानूनी दांव-पेंचों से जुड़े जोखिमों को उजागर करता है।
इसके विपरीत, Coforge ने नेट प्रॉफिट में 125% की भारी उछाल दर्ज की, हालाँकि कंपनी ने स्पष्ट किया कि यह पिछले साल के कम बेस इफेक्ट के कारण भी था। Persistent Systems ने भी 20.5% की सीक्वेंशियल ग्रोथ दिखाई। लेकिन, इन सभी कंपनियों के लिए, इन अधिग्रहणों की लागत - जिसमें बड़ा कैश आउटफ्लो या कर्ज शामिल हो सकता है - का मतलब है कि इन नए व्यवसायों को एकीकृत करते समय कैश फ्लो और प्रॉफिट मार्जिन पर कड़ी नज़र रखी जाएगी।
वैल्यूएशन का सवाल
आजकल ये मिड-कैप IT स्टॉक, दुनिया की कुछ सबसे बड़ी टेक कंपनियों की तुलना में काफी ज्यादा वैल्यूएशन पर ट्रेड कर रहे हैं। Persistent Systems का P/E 39.6 गुना है, और Coforge का 38.8 गुना। हालिया कानूनी खर्चों के कारण प्रॉफिट में गिरावट के बावजूद, Cyient का P/E 20.9 गुना है।
तुलना के लिए, Microsoft और Oracle जैसी ग्लोबल टेक दिग्गज क्रमशः 21.9 गुना और 30 गुना के कम मल्टीपल पर ट्रेड करती हैं। इसका मतलब है कि भारतीय मिड-कैप स्टॉक्स में बहुत ऊंची ग्रोथ की उम्मीदें पहले से ही शामिल हैं। अगर AI से रेवेन्यू उम्मीदों के मुताबिक तेजी से नहीं बढ़ा, तो इन स्टॉक्स पर दबाव आ सकता है।
निवेशकों को क्या देखना चाहिए?
अब सबसे महत्वपूर्ण है इन कंपनियों का निष्पादन (execution)। कंपनी खरीदना आसान है; उसे लाभदायक बनाना और मूल कंपनी के साथ सांस्कृतिक रूप से जोड़ना मुश्किल है। निवेशकों को निम्नलिखित बातों पर ध्यान देना चाहिए:
- प्रॉफिट मार्जिन: देखें कि क्या इन अधिग्रहणों की लागत आने वाली तिमाहियों में ऑपरेटिंग मार्जिन पर दबाव डालती है।
- रेवेन्यू ग्रोथ: ट्रैक करें कि पारंपरिक सेवाओं के बजाय नए AI बिज़नेस से वास्तव में कितनी रेवेन्यू ग्रोथ आ रही है।
- कर्ज का स्तर: जांचें कि क्या कंपनियां इन महंगे अधिग्रहणों को फंड करने के लिए बहुत अधिक कर्ज ले रही हैं।
- एकीकरण की प्रगति: मैनेजमेंट से यह जानने की कोशिश करें कि अधिग्रहित टीमें अपेक्षित तकनीकी और व्यावसायिक परिणाम दे रही हैं या नहीं।
