Microsoft ने दुनिया भर में अपने लगभग 60,000 कर्मचारियों के लिए Voluntary Exit Offer (VEO) पेश किया है। कंपनी अपना पूरा ध्यान **$175 बिलियन** के AI इंफ्रास्ट्रक्चर प्लान पर लगा रही है, जिसके कारण कॉस्ट कटिंग की जा रही है।
भारी भरकम AI प्लान और वर्कफोर्स में बदलाव
Microsoft की रणनीति अब पूरी तरह से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की तरफ झुक गई है। कंपनी ने अपनी ग्लोबल वर्कफोर्स का करीब 27% हिस्सा यानी 60,000 कर्मचारियों के लिए Voluntary Exit Offer (VEO) रोल आउट किया है। यह प्रोग्राम भारत समेत दुनियाभर के उन कर्मचारियों के लिए है जो लेवल 70 और उससे नीचे के पदों पर हैं। इसका फैसला लेने की डेडलाइन 1 दिसंबर 2026 तय की गई है।
रिकॉर्ड मुनाफे के बाद भी खर्चे पर लगाम
कंपनी ने सितंबर 2026 में खत्म हुई तिमाही में शानदार प्रदर्शन किया है। कंपनी का रेवेन्यू $92.3 बिलियन रहा जो पिछले साल के मुकाबले 19% अधिक है, वहीं नेट इनकम 32% बढ़कर $36.6 बिलियन पर पहुंच गई। बावजूद इसके, कंपनी ने 2026 कैलेंडर ईयर के लिए AI इंफ्रास्ट्रक्चर और डेटा सेंटर्स पर $175 बिलियन खर्च करने का लक्ष्य रखा है। इसी भारी निवेश की वजह से ऑपरेशनल लागत को कम किया जा रहा है।
भारत में कर्मचारियों के बीच चिंता
इस शिफ्ट का सीधा असर भारत में काम कर रहे कर्मचारियों की सैलरी पर भी दिखा है। हालिया अप्रेजल साइकिल में एक बड़े वर्ग को 5% या उससे कम की ही वेतन वृद्धि मिली है। जानकारों का कहना है कि कंपनी के रिकॉर्ड मुनाफे और कर्मचारियों के सीमित हाइक के बीच एक बड़ी खाई बन गई है, जिससे टैलेंट रिटेंशन (Talent Retention) पर खतरा मंडरा रहा है।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
यह ऑफर कंपनी के सेल्स, मार्केटिंग और डेटा सेंटर ऑपरेशंस जैसे कोर रेवेन्यू-जेनरेटिंग विभागों पर लागू नहीं होगा। यानी Microsoft अपने मुख्य व्यापारिक अंगों को सुरक्षित रखना चाहती है। अब निवेशकों की नजर इस बात पर है कि क्या यह रीस्ट्रक्चरिंग बिना प्रोडक्टिविटी गिराए कंपनी के कॉस्ट बेस को कम कर पाएगी, या फिर महत्वपूर्ण टैलेंट के जाने से काम पर असर पड़ेगा।
