Micron Technology के ताइवान प्लांट में काम करने वाले **10,000** कर्मचारियों और मैनेजमेंट के बीच बोनस के स्ट्रक्चर को लेकर विवाद छिड़ गया है। फिलहाल मामला मेडिएशन में है और हालांकि अभी काम बंद नहीं हुआ है, लेकिन निवेशकों के लिए यह चिंता का विषय है क्योंकि कंपनी की **60%** चिप प्रोडक्शन क्षमता इसी हब से आती है।
विवाद की असली वजह क्या है?
Micron Technology की ताइवान स्थित ताओयुआन और ताइचुंग फैसिलिटीज में यह विवाद शुरू हुआ है। यूनियन चाहती है कि कंपनी अपने इंसेंटिव पे प्लान को बदलकर प्रॉफिट-शेयरिंग मॉडल अपनाए, जो दक्षिण कोरिया की दिग्गज कंपनियों Samsung और SK Hynix जैसा हो। दूसरी ओर, कंपनी का कहना है कि वे लगातार कर्मचारियों के साथ बातचीत कर रहे हैं और इस साल का बोनस कंपनी के इतिहास में अब तक का सबसे ज्यादा है।
क्यों है निवेशकों के लिए बड़ा रिस्क?
ताइवान में मौजूद इन फैसिलिटीज में कंपनी की कुल DRAM और हाई-बैंडविड्थ मेमोरी चिप्स की 60% प्रोडक्शन क्षमता है। चूंकि ये चिप्स आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस (AI) हार्डवेयर के लिए बेहद जरूरी हैं, इसलिए भविष्य में किसी भी तरह की रुकावट ग्लोबल सप्लाई चेन पर बुरा असर डाल सकती है।
आगे की कानूनी स्थिति
ताइवान के लेबर कानून के तहत, जब तक मेडिएशन की प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, तब तक हड़ताल नहीं की जा सकती। उम्मीद है कि यह प्रक्रिया सितंबर के मध्य तक चलेगी। निवेशकों को अब इस पर नजर रखनी चाहिए कि क्या मैनेजमेंट और यूनियन किसी समझौते पर पहुँच पाते हैं, क्योंकि अगर लेबर कॉस्ट बढ़ती है तो कंपनी के ऑपरेटिंग मार्जिन पर दबाव पड़ना तय है।
