Meta ने WhatsApp पर किशोरों की सुरक्षा के लिए नए PIN-प्रोटेक्टेड पैरेंटल कंट्रोल्स पेश किए हैं। यह कदम युवाओं की सुरक्षा को लेकर बढ़ रही कानूनी और रेगुलेटरी सख्ती के बीच उठाया गया है।
सुरक्षा के नए फीचर्स
अब पैरेंट्स के पास किशोरों के अकाउंट पर अधिक कंट्रोल होगा। नए PIN-प्रोटेक्टेड इंटरफेस के जरिए माता-पिता यह तय कर सकेंगे कि कौन उनके बच्चों को ग्रुप में जोड़ सकता है और कौन उनकी प्रोफाइल या स्टेटस देख सकता है। इसके साथ ही, Meta AI के लिए भी 'Limited Content' मोड जोड़ा गया है, जिससे ऑटोमेटेड मैसेज समरी और इनकॉग्निटो चैट जैसे फीचर्स को प्रतिबंधित किया जा सकेगा ताकि बच्चों को गलत कंटेंट से दूर रखा जा सके।
रेगुलेटरी दबाव और निवेशकों पर असर
यह बदलाव सिर्फ फीचर्स तक सीमित नहीं है, बल्कि यह Meta की एक रणनीतिक चाल है। कंपनी लगातार अमेरिकी राज्यों और कानून निर्माताओं से किशोरों पर सोशल मीडिया के प्रभाव को लेकर कानूनी चुनौतियों का सामना कर रही है। इन सुरक्षा मानकों को अपनाकर Meta बड़ी पेनल्टी और सख्त सरकारी नियमों से बचने की कोशिश कर रही है।
निवेशकों के लिए यह एक महत्वपूर्ण अपडेट है, क्योंकि बाल सुरक्षा से जुड़े विवादों का सीधा असर कंपनी की लागत और ऑपरेशनल फोकस पर पड़ता है। हालांकि, कंपनी ने स्पष्ट किया है कि ये बदलाव End-to-End Encryption को प्रभावित नहीं करेंगे, जिससे यूजर्स का भरोसा बना रहेगा। भविष्य में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या ये स्वैच्छिक उपाय रेगुलेटर्स को संतुष्ट कर पाएंगे या सरकार की तरफ से और भी कड़े नियम लाए जाएंगे, जो कंपनी के लीगल खर्चों को प्रभावित कर सकते हैं।
