Meta Platforms अपने आगामी Connect इवेंट में बिना कैमरे वाले स्मार्ट ग्लासेस पेश करने जा रही है। डेटा प्राइवेसी और कानूनी दबावों के बीच कंपनी का यह एक बड़ा स्ट्रैटेजिक बदलाव है, जो अब मार्केट में नई बहस छेड़ रहा है।
प्राइवेसी पर फोकस और कानूनी घेरा
Meta अपने अपकमिंग इवेंट में जो नई हार्डवेयर टेक्नोलॉजी लाने की तैयारी कर रही है, उसमें सबसे बड़ा बदलाव कैमरे का न होना है। कंपनी पर दुनिया भर में डेटा रिकॉर्डिंग और प्रोसेसिंग को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं। इस कदम को उन कानूनी चुनौतियों के जवाब के तौर पर देखा जा रहा है, जिसमें कंपनी पर आरोप है कि उसने यूजर्स के वीडियो डेटा का गलत इस्तेमाल किया है। कैलिफोर्निया में चल रहे क्लास-एक्शन लॉसूट के बीच Meta खुद को बेहतर स्थिति में लाने की कोशिश कर रही है।
बिजनेस पर क्या होगा असर?
EssilorLuxottica (Ray-Ban की पेरेंट कंपनी) के साथ साझेदारी में Meta ने पिछले साल 70 लाख से ज्यादा यूनिट्स बेची हैं। लेकिन अब कैमरे को हटाकर कंपनी के सामने एक बड़ी चुनौती है—यूजर को यह कैसे समझाना कि बिना कैमरे वाले ये ग्लासेस सिर्फ ब्लूटूथ इयरबड्स से कैसे अलग और बेहतर हैं? मार्केट एनालिस्ट्स की नजर इस बात पर है कि क्या बिना वीडियो रिकॉर्डिंग फीचर के ग्राहक इस प्रोडक्ट के लिए पैसे खर्च करना चाहेंगे।
कॉम्पिटिटिव मार्केट की जंग
बाजार में Snap जैसी कंपनियां पहले से ही ऑगमेंटेड रियलिटी (AR) में तेजी से निवेश कर रही हैं। Meta के पाइपलाइन में 'Phoenix' कोडनेम वाला AR प्रोजेक्ट भी है, लेकिन अभी कंपनी का पूरा फोकस प्राइवेसी को लेकर अपनी छवि सुधारने पर है। इन्वेस्टर्स के लिए यह देखना दिलचस्प होगा कि बिना विजुअल कैप्चर फीचर के कंपनी के वियरेबल सेगमेंट की ग्रोथ पर क्या असर पड़ता है।
