Meta, TikTok और X ने UK के रेगुलेटर Ofcom के खिलाफ कानूनी मोर्चा खोल दिया है। मामला 2023 Online Safety Act के तहत मांगे गए डेटा से जुड़ा है, जो इन कंपनियों के लिए बड़े फाइनेंशियल रिस्क का संकेत है।
कानूनी लड़ाई का कारण
UK का कम्युनिकेशन रेगुलेटर Ofcom अब इन टेक कंपनियों से उनके कंटेंट मॉडरेशन और यूजर्स की सुरक्षा से जुड़ी बारीक डिटेल्स मांग रहा है। कंपनीज का कहना है कि ये मांगें जरूरत से ज्यादा बड़ी हैं और उनके काम-काज पर बेवजह का बोझ डालती हैं। X (जिसे पहले Twitter के नाम से जाना जाता था) का दावा है कि दुनिया भर के किसी भी रेगुलेटर की तरफ से यह अब तक की सबसे कठिन डेटा डिमांड है। वहीं, Meta और TikTok ने भी कोर्ट में अपनी दलीलें पेश की हैं, जिसमें उन्होंने नियमों को तर्कहीन बताया है।
क्यों है इतना बड़ा खतरा?
2023 Online Safety Act के कड़े प्रावधानों के मुताबिक, अगर ये कंपनियां नियमों का उल्लंघन करती हैं, तो उन पर उनके ग्लोबल एनुअल टर्नओवर का 10% तक भारी-भरकम जुर्माना लगाया जा सकता है। यह न सिर्फ इन कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन को प्रभावित करेगा, बल्कि भविष्य में डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए रेगुलेटरी माहौल को और भी सख्त बना सकता है।
आगे क्या होगा?
यह केस अब एक मिसाल बनेगा कि टेक कंपनियां रेगुलेटरी बदलावों को कैसे मैनेज करती हैं। Meta पहले से ही इस एक्ट के तहत फीस और पेनल्टी तय करने के तरीके को लेकर एक और कानूनी लड़ाई में उलझा हुआ है, जिसकी सुनवाई अक्टूबर 2026 में होनी है। फिलहाल, सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि कोर्ट डेटा डिमांड्स के इस मामले पर क्या फैसला सुनाता है।
