Meta ने भारत में अपने Facebook ऐप के इंटरफेस में एक बड़े बदलाव का पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया है। अब ऐप पूरी तरह से वीडियो-केंद्रित Reels अनुभव में बदल रहा है। इस कदम से यूजर एंगेजमेंट बढ़ाने की तैयारी है, लेकिन AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर हो रहे भारी खर्च के चलते निवेशकों की नजरें कंपनी के प्रॉफिट मार्जिन पर टिकी हैं।
भारत क्यों है मेटा के लिए अहम?
भारत में अपने विशाल यूजर बेस के चलते मेटा इस बदलाव को यहां टेस्ट कर रही है। नई व्यवस्था में यूजर्स सीधे Reels फीड पर लैंड करेंगे। हालांकि, किसी भी संभावित असंतोष को देखते हुए कंपनी ने 'ऑप्ट-आउट' का विकल्प भी दिया है, जिससे यूजर पारंपरिक फीड पर वापस लौट सकते हैं।
फाइनेंशियल प्रेशर और AI का दांव
निवेशकों की चिंता के पीछे ठोस वजहें हैं। कंपनी की Q2 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, रेवेन्यू में 28% की सालाना बढ़ोतरी के साथ यह $60.8 बिलियन तक पहुंच गया है। लेकिन, ऑपरेटिंग मार्जिन पिछले साल के 43% से गिरकर 31% रह गया है। इसका मुख्य कारण कंपनी का AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर किया जा रहा भारी निवेश है, जिसका कुल कैपिटल खर्च $130 बिलियन से $145 बिलियन रहने का अनुमान है।
रेगुलेटरी और मार्केट रिस्क
मेटा पर केवल खर्च का दबाव नहीं है, बल्कि कानूनी चुनौतियां भी हैं। Ofcom जैसी संस्थाएं इंस्टाग्राम फीचर्स की सेफ्टी को लेकर जांच कर रही हैं, जिससे भविष्य में जुर्माने का रिस्क बना हुआ है। अब बाजार यह देखना चाहता है कि क्या यह वीडियो-फर्स्ट रणनीति विज्ञापन से होने वाली कमाई को बढ़ा पाएगी या नहीं, क्योंकि मेटा के शेयर पर ग्लोबल मार्केट और उसके AI निवेश की दक्षता का सीधा असर पड़ता है।
