Meta अपने Muse AI के लिए एक नए 'ह्यूमन-असिस्टेड' फीचर की टेस्टिंग कर रहा है। कॉल्स की सटीक जानकारी के लिए थर्ड-पार्टी कॉन्ट्रैक्टर्स की मदद लेने पर डेटा प्राइवेसी को लेकर सवाल उठ रहे हैं, जो निवेशकों के लिए चिंता का विषय बन सकता है।
क्या है नया फीचर?
Meta Platforms फिलहाल अपने Muse AI असिस्टेंट के लिए एक खास फीचर की टेस्टिंग में जुटा है। इसका मकसद डिजिटल एजेंट और बाहरी मर्चेंट्स के बीच होने वाली बातचीत को और ज्यादा सटीक बनाना है। कंपनी का मानना है कि ऑटोमेटेड रिस्पॉन्स के साथ-साथ इंसानी निगरानी रहने से सर्विस क्वालिटी में बड़ा सुधार होगा।
प्राइवेसी को लेकर क्यों है विवाद?
हालांकि, इस फीचर को लेकर कंपनी के भीतर ही सवाल उठने लगे हैं। इसमें थर्ड-पार्टी कॉन्ट्रैक्टर्स का उपयोग किया जा रहा है, जो वॉइस डेटा को एक्सेस कर सकते हैं। कर्मचारियों ने डेटा सुरक्षा पर चिंता जताई है क्योंकि कंपनी के लिए प्राइवेसी एक ऐसा संवेदनशील मुद्दा रहा है, जिसने पहले भी शेयर की कीमतों और रेगुलेटरी माहौल पर गहरा असर डाला है।
निवेशकों के लिए क्यों है यह जरूरी?
Meta का पूरा बिजनेस मॉडल यूजर डेटा और विज्ञापन पर आधारित है। ऐसे में AI के विस्तार के साथ प्राइवेसी से जुड़ी कोई भी छोटी चूक रेगुलेटर्स की नजर में आ सकती है। आने वाले समय में निवेशकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण यह देखना होगा कि कंपनी इस फीचर को लॉन्च करते समय सुरक्षा के क्या कड़े इंतजाम करती है और क्या वह बिना किसी विवाद के अपनी AI रणनीति को आगे बढ़ा पाती है।
