Meta Platforms अब Instagram पर **90-मिनट** तक के वीडियो अपलोड करने की टेस्टिंग कर रहा है। कंपनी का मकसद YouTube के लॉन्ग-फॉर्म कंटेंट मार्केट में अपनी जगह बनाना और यूजर्स को ऐप पर ज्यादा समय तक रोककर रखना है।
स्ट्रैटेजिक बदलाव और टेस्टिंग
Meta ने अमेरिका और ब्राजील के कुछ चुनिंदा यूजर्स के साथ 90-मिनट के वीडियो अपलोड करने की टेस्टिंग शुरू कर दी है। यह Instagram की रणनीति में एक बड़ा बदलाव है, क्योंकि अब तक कंपनी का पूरा फोकस सिर्फ Reels यानी शॉर्ट-फॉर्म कंटेंट पर रहा है। इस कदम का सीधा मकसद YouTube के उस ऑडियंस बेस को खींचना है जो लंबे वीडियो देखने के लिए जाना जाता है।
असली चुनौती: कमाई का गणित (Monetization Hurdles)
कंपनी के लिए सबसे बड़ी चुनौती क्रिएटर्स की कमाई है। YouTube अपने पार्टनर प्रोग्राम के जरिए क्रिएटर्स को विज्ञापन रेवेन्यू में हिस्सा देता है, जबकि Instagram पर अभी भी यह सिस्टम काफी बिखरा हुआ है। यहां क्रिएटर्स मुख्य रूप से ब्रांड पार्टनरशिप या सब्सक्रिप्शन पर निर्भर हैं। लंबे वीडियो को सफल बनाने के लिए Meta को एक बेहतर रेवेन्यू-शेयरिंग मॉडल लाने की जरूरत होगी, जो फिलहाल कंपनी के पास तैयार नहीं है।
पुराना इतिहास और जोखिम
निवेशकों को याद होगा कि Meta इससे पहले IGTV जैसा फीचर ला चुका है, जो ज्यादा नहीं चल पाया और बाद में बंद करना पड़ा। अब डर यह है कि कहीं लंबे वीडियो के चक्कर में Instagram का यूजर एक्सपीरियंस खराब न हो जाए। अगर ऐप इस्तेमाल करना मुश्किल या 'मेसी' लगा, तो इससे डेली एक्टिव यूजर्स की संख्या पर असर पड़ सकता है।
आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्रिएटर्स इस फॉर्मेट को कितना अपनाते हैं और क्या कंपनी YouTube जैसी कोई ठोस कमाई की स्कीम पेश कर पाती है या नहीं।
