Meta और Snap की मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं। लॉस एंजिल्स में एक जूरी ट्रायल शुरू होने जा रहा है, जिसमें इन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर किशोरों की मानसिक सेहत को नुकसान पहुंचाने के गंभीर आरोप लगे हैं।
लॉस एंजिल्स की अदालत में बुधवार से एक हाई-प्रोफाइल कानूनी लड़ाई शुरू हो रही है, जहां Meta और Snap का आमना-सामना होगा। आरोपों के मुताबिक, Facebook, Instagram और Snapchat जैसे प्लेटफॉर्म्स ने युवाओं के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को प्रभावित किया है। यह मामला सोशल मीडिया सेक्टर के लिए एक टर्निंग पॉइंट साबित हो सकता है, क्योंकि अब ऐप डिजाइन और यूजर एंगेजमेंट के तरीकों पर सख्त सवाल उठ रहे हैं।\n\n### क्या है मुख्य विवाद?\n\nवादी पक्ष का तर्क है कि इन कंपनियों ने जानबूझकर ऐसे फीचर्स डिजाइन किए जो 'एडिक्टिव' यानी लत लगाने वाले हैं, ताकि किशोर यूजर ज्यादा समय तक ऐप पर बने रहें। कानूनी प्रतिनिधियों का कहना है कि इसी रणनीति के चलते युवाओं में ईटिंग डिसऑर्डर और मानसिक तनाव जैसी गंभीर समस्याएं देखी गई हैं। जहां Meta ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए मजबूती से लड़ने की बात कही है, वहीं Snap खुद को अलग खड़ा करने की कोशिश कर रहा है। Snap का कहना है कि उनका प्लेटफॉर्म कंटेंट-फीड के बजाय एक मैसेजिंग सर्विस के रूप में काम करता है।\n\n### निवेशकों के लिए क्यों है जरूरी?\n\nयह ट्रायल सिर्फ कानूनी मामले तक सीमित नहीं है। अगर फैसला कंपनियों के खिलाफ जाता है, तो उन्हें अपने प्रोडक्ट डिजाइन में बड़े बदलाव करने पड़ सकते हैं, जिसका सीधा असर उनके एंगेजमेंट मेट्रिक्स और विज्ञापन से होने वाली कमाई पर पड़ेगा। निवेशकों की नजर इस बात पर है कि क्या यह कानूनी दबाव भविष्य में सख्त सरकारी रेगुलेशन का रूप ले लेगा। ट्रायल के दौरान Mark Zuckerberg और Evan Spiegel जैसी दिग्गजों की गवाही भी दर्ज की जाएगी, जिस पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी होंगी।
