Meta Platforms ने अमेरिका में युवाओं की मानसिक सेहत से जुड़े कानूनी विवाद को सुलझाने के लिए **$18 अरब** के सेटलमेंट पर सहमति जताई है। इस डील के तहत कंपनी को अगले एक दशक में **$12.7 अरब** का भुगतान करना होगा और टीनेजर्स के लिए प्लेटफॉर्म पर सख्त सुरक्षा बदलाव लागू करने होंगे।
सेटलमेंट का गणित और स्ट्रक्चर
इस बड़ी डील को दो हिस्सों में बांटा गया है। $12.7 अरब की राशि अगले 10 सालों में चुकाई जाएगी, जो एक गारंटीड पेमेंट है। इसके अलावा, $5.3 अरब की अतिरिक्त राशि इस बात पर निर्भर करेगी कि Alphabet की YouTube और ByteDance की TikTok जैसी प्रतिस्पर्धी कंपनियां सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाती हैं। Meta ने साफ किया है कि इस समझौते का मतलब कोई गलती स्वीकार करना नहीं है।
बिजनेस मॉडल पर बड़ा असर
निवेशकों के लिए असली चुनौती सेटलमेंट की रकम से ज्यादा कंपनी के ऑपरेशनल बदलाव हैं। अब 18 साल से कम उम्र के यूजर्स के लिए प्लेटफॉर्म पर 2 घंटे का डेली टाइम लिमिट और रात 12 बजे से सुबह 6 बजे तक एक्सेस ब्लॉक अनिवार्य होगा। चूंकि Meta का मुख्य रेवेन्यू विज्ञापन (Ads) से आता है और यह यूजर्स द्वारा प्लेटफॉर्म पर बिताए गए समय पर टिका है, इसलिए इन नई पाबंदियों से कंपनी की एंगेजमेंट और कमाई पर दबाव पड़ सकता है।
क्या है रेगुलेटरी जोखिम?
यह समझौता भविष्य के लिए एक कानूनी मिसाल बन गया है। जिस तरह से तंबाकू कंपनियों के उत्पादों को रेगुलेट किया गया था, उसी तर्ज पर डिजिटल प्रोडक्ट्स के आर्किटेक्चर में बदलाव की मांग अब तेज हो सकती है। ग्लोबल रेगुलेटर्स अब इसे बारीकी से देख रहे हैं, जिसका असर आने वाले समय में भारत जैसे बाजारों में भी देखने को मिल सकता है, जहाँ सरकारें भी यूजर सुरक्षा के लिए सख्त नियम ला सकती हैं।
