Meta Platforms ने किशोरों की सोशल मीडिया लत से जुड़े एक बड़े कानूनी मामले को सेटल कर लिया है, जबकि Snap Inc. के खिलाफ मुकदमा लॉस एंजिल्स की अदालत में जारी रहेगा।
कानूनी सेटलमेंट की हकीकत
Meta Platforms ने उस कानूनी विवाद को खत्म करने का फैसला किया है, जिसमें आरोप लगाया गया था कि कंपनी के प्लेटफॉर्म्स किशोरों में मानसिक स्वास्थ्य और ईटिंग डिसऑर्डर जैसी समस्याओं को बढ़ावा दे रहे हैं। लॉस एंजिल्स की अदालत में जूरी चयन के ठीक बाद यह सेटलमेंट हुआ, जिससे Meta अब इस विशेष ट्रायल से बाहर हो गई है। हालांकि, अब सारा ध्यान Snap Inc. पर केंद्रित हो गया है, जिसके खिलाफ कानूनी कार्यवाही जारी है।
बिजनेस मॉडल पर बड़ा खतरा
यह केवल एक मामला नहीं है, बल्कि अमेरिका में ऐसे हजारों मुकदमे पेंडिंग हैं। इनमें स्कूल डिस्ट्रिक्ट से लेकर आम नागरिक तक शामिल हैं, जिनका आरोप है कि इन टेक कंपनियों ने प्लेटफॉर्म्स को इस तरह डिजाइन किया है कि युवा इसके आदी हो जाएं। मुख्य विवाद 'इन्फिनिट स्क्रॉलिंग' और 'ऑटो-प्ले' जैसे फीचर्स पर है, जिन्हें कथित तौर पर यूजर इंगेजमेंट बढ़ाने के लिए बनाया गया था।
निवेशकों के लिए चिंता की बात यह है कि यदि कोर्ट इन कंपनियों को जिम्मेदार मानती है, तो इन्हें अपने बिजनेस मॉडल में बुनियादी बदलाव करने पड़ सकते हैं, जिसका सीधा असर इनके विज्ञापन राजस्व (Advertising Revenue) और यूजर मेट्रिक्स पर पड़ेगा।
सरकारी दबाव और भविष्य की चुनौती
अदालती मुकदमों के अलावा, Meta पर सरकारी स्तर पर भी दबाव है। हाल ही में न्यू मैक्सिको में डेटा प्राइवेसी और कंटेंट मॉडरेशन को लेकर $25 बिलियन के जुर्माने की खबर सामने आई थी, जिसे कंपनी चुनौती देने की तैयारी में है। TikTok और YouTube जैसी कंपनियां पहले ही इस तरह के मामलों में सेटलमेंट कर चुकी हैं, जिससे संकेत मिलता है कि टेक सेक्टर में कानूनी जोखिम का दौर अभी लंबा चलने वाला है। अब निवेशकों की नजरें Snap Inc. के ट्रायल के नतीजों पर टिकी हैं, जो भविष्य की दिशा तय करेंगे।
