Meta Platforms के तिमाही नतीजों में भारी कानूनी खर्च का असर दिखा है। कंपनी को **$9.86 बिलियन** का मुनाफा हुआ है, लेकिन **$43 बिलियन** के कानूनी सेटलमेंट और पेनाल्टी ने मुनाफे पर चोट की है। साथ ही, कंपनी ने AI इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए अपना कैपिटल एक्सपेंडिचर गाइडेंस बढ़ाकर **$145 बिलियन** कर दिया है।
कानूनी दांव-पेच और असर
जुलाई से सितंबर 2026 की अवधि के दौरान Meta Platforms का मुनाफा बाजार की उम्मीदों के मुकाबले कम रहा। इसकी सबसे बड़ी वजह $43 बिलियन का वह लीगल बिल है, जो कंपनी को चुकाना पड़ा। इसमें अमेरिकी राज्यों के साथ $18 बिलियन का सेटलमेंट और न्यू मैक्सिको कोर्ट द्वारा कैंब्रिज एनालिटिका केस में लगाया गया $25 बिलियन का जुर्माना शामिल है। ये वन-टाइम खर्चे कंपनी के मुख्य विज्ञापन कारोबार के परफॉरमेंस को दबा रहे हैं।
AI पर बड़ा दांव
कानूनी झटकों के बीच, Meta का पूरा फोकस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) इंफ्रास्ट्रक्चर को खड़ा करने पर है। सिर्फ तीसरी तिमाही में कंपनी ने $35 बिलियन कैपिटल प्रोजेक्ट्स पर खर्च किए हैं। इस आक्रामक रणनीति के चलते कंपनी ने अपने पूरे साल के कैपिटल एक्सपेंडिचर के अनुमान को $130 बिलियन से बढ़ाकर $145 बिलियन कर दिया है, जो 2025 के मुकाबले एक बड़ी छलांग है।
निवेशकों के लिए चुनौतियां
Alphabet और Microsoft जैसी दिग्गज कंपनियों की तरह, Meta भी AI रेस में सबसे आगे रहना चाहती है। लेकिन निवेशकों की चिंता यह है कि क्या इतना बड़ा निवेश भविष्य में सही रिटर्न दे पाएगा? फिलहाल, भारी खर्च के कारण बायबैक या डिविडेंड के लिए उपलब्ध कैश कम हो गया है। आने वाले समय में कंपनी के लिए सबसे बड़ी चुनौती अपने AI इंफ्रास्ट्रक्चर से रेवेन्यू जेनरेट करना और ऑपरेशनल कॉस्ट को मैनेज करना होगा। मार्केट अब इस बात पर नजर रखेगा कि मैनेजमेंट शेयरहोल्डर्स के रिटर्न और बढ़ते खर्चों के बीच तालमेल कैसे बिठाता है।
