Meta Platforms: कर्मचारियों की बगावत के बाद 'Project OT' रद्द, AI के दम पर नौकरी काटने का प्लान फेल

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Meta Platforms: कर्मचारियों की बगावत के बाद 'Project OT' रद्द, AI के दम पर नौकरी काटने का प्लान फेल

Meta ने अपने विवादास्पद 'Project OT' प्लान को ठंडे बस्ते में डाल दिया है। इस पहल के जरिए कंपनी इंसानी वर्कफोर्स को AI एजेंट्स से बदलना चाहती थी, लेकिन तकनीकी खराबी और आंतरिक विरोध के चलते इसे रोकना पड़ा।

Meta Platforms ने आखिरकार अपने बेहद महत्वाकांक्षी और विवादित इंटरनल इनिशिएटिव 'Project OT' (Organization Transformation) को आधिकारिक रूप से बंद कर दिया है। इस प्लान का मकसद कंपनी को एक 'AI-नेटिव' वर्कफोर्स में बदलना था, जिसके लिए बड़े पैमाने पर कर्मचारियों की छंटनी की तैयारी थी। कंपनी ने मई 2026 में छंटनी का पहला दौर पूरा किया था, जिसमें 10% कर्मचारियों को बाहर निकाला गया था, लेकिन नवंबर में होने वाला दूसरा चरण अब रद्द कर दिया गया है।

तकनीकी फेलियर और आंतरिक विरोध

इस फैसले के पीछे का मुख्य कारण कंपनी के भीतर ही हुआ जोरदार विरोध है। कर्मचारियों को डर था कि उनकी जगह ऑटोनॉमस AI एजेंट्स ले लेंगे। हालांकि, सिर्फ morale का मुद्दा ही नहीं, बल्कि तकनीकी खामियां भी बड़ी बाधा बनीं। कंपनी के डेटा के अनुसार, इंटरनल कोड जनरेशन में तो 220% की बढ़ोतरी हुई, लेकिन असल में यूजर-फेसिंग फीचर्स के मामले में केवल 36% ही ग्रोथ दिखी। इसके अलावा, ऑटोनॉमस एजेंट्स के कारण तकनीकी और सिक्योरिटी इंसीडेंट्स में 40% का उछाल देखा गया, जिससे सिस्टम में बड़े व्यवधान पैदा हुए।

निवेशकों के लिए क्या है चिंता?

निवेशकों के लिए सबसे बड़ी चुनौती AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर हो रहा भारी-भरकम खर्च है। कंपनी ने साल 2026 के लिए $130 बिलियन से $145 बिलियन तक के निवेश का लक्ष्य रखा है। इसका असर फाइनेंशियल नतीजों पर साफ दिख रहा है। Q2 2026 में कंपनी का कुल खर्च 55% बढ़कर $42.03 बिलियन पहुंच गया, जिससे ऑपरेटिंग मार्जिन गिरकर 31% रह गया। अब शेयरधारकों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या कंपनी का भारी-भरकम निवेश भविष्य में रेवेन्यू के रूप में मुनाफे में तब्दील हो पाएगा या नहीं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.