Meta Platforms पर ऑस्ट्रेलिया में नया क्लास एक्शन मुकदमा दर्ज हुआ है। आरोप है कि कंपनी के एल्गोरिदम नाबालिगों को सोशल मीडिया का आदी बना रहे हैं, जो ग्लोबल टेक निवेशकों के लिए एक बड़ी रेगुलेटरी चिंता का विषय है।
सोशल मीडिया दिग्गज Meta Platforms एक बार फिर कानूनी घेरे में है। ऑस्ट्रेलिया की फेडरल कोर्ट में लॉ फर्म MinterEllison ने आठ वादियों की ओर से यह मुकदमा दायर किया है। आरोप लगाया गया है कि मेटा के एंगेजमेंट एल्गोरिदम को जानबूझकर ऐसा बनाया गया है ताकि कम उम्र के यूजर प्लेटफॉर्म पर ज्यादा समय बिताएं, जिससे उन्हें इसकी लत लग गई।
निवेशकों के लिए क्या है रिस्क?
Meta का पूरा बिजनेस मॉडल यूजर एंगेजमेंट पर टिका है, जिससे कंपनी विज्ञापन के जरिए कमाई करती है। यदि कोर्ट के दबाव में कंपनी को अपने एल्गोरिदम में बदलाव करना पड़ा, तो इससे यूजर एंगेजमेंट कम हो सकता है। यह सीधे तौर पर कंपनी के रेवेन्यू और ग्रोथ पर बुरा असर डाल सकता है।
क्या बन रही है बड़ी कानूनी दिक्कत?
यह मामला कोई अकेला वाकया नहीं है। ऑस्ट्रेलिया सरकार बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर 16 साल की उम्र की पाबंदी और एल्गोरिदम फीड बंद करने जैसे कानून पर विचार कर रही है। इससे पहले भी मेटा को अमेरिका में ऐसा ही विवाद सुलझाने के लिए $18 बिलियन का भारी-भरकम सेटलमेंट करना पड़ा था। बार-बार होने वाले ऐसे कानूनी विवादों से कंपनी पर भारी खर्च का बोझ पड़ता है और साथ ही भविष्य में और भी कड़े रेगुलेटरी नियमों का खतरा बना रहता है।
फिलहाल, ऑस्ट्रेलियाई कोर्ट ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए 'सप्रेशन ऑर्डर' जारी किया है, जिससे वादियों की पहचान गुप्त रखी गई है। निवेशक अब आगे की सुनवाई और वहां के सरकारी फैसलों पर नजर बनाए हुए हैं, क्योंकि यही तय करेगा कि मेटा को कितना वित्तीय हर्जाना भरना पड़ सकता है।
