9 सितंबर, 2026 को Meta India के सीनियर लीडरशिप को National Commission for Protection of Child Rights (NCPCR) के सामने पेश होना पड़ा। Instagram पर बच्चों के शोषण से जुड़ी सामग्री के विज्ञापन दिखने की खबरों के बाद यह जांच शुरू की गई है, जो कंपनी के लिए बड़े रेगुलेटरी जोखिम की ओर इशारा करती है।
9 सितंबर, 2026 को Meta India के वरिष्ठ अधिकारी नई दिल्ली स्थित National Commission for Protection of Child Rights (NCPCR) के सामने पेश हुए। यह समन उस औपचारिक जांच का हिस्सा है जिसमें Meta के प्लेटफॉर्म्स, जैसे Instagram और Facebook पर बच्चों के यौन शोषण (CSEAM) को बढ़ावा देने वाले विज्ञापनों के आरोप लगे हैं। इस पूरी प्रक्रिया में Ministry of Electronics and Information Technology (MeitY) की निगरानी भी शामिल है, जो सरकार की सख्त रुख को दर्शाती है।
जांच की शुरुआत कैसे हुई?
यह विवाद जुलाई 2026 में आई एक BBC Eye रिपोर्ट के बाद शुरू हुआ। हालांकि Meta ने दावा किया है कि उसने Q2 2026 के नतीजों में 3.6 करोड़ से ज्यादा आपत्तिजनक कंटेंट और लाखों संदिग्ध अकाउंट्स को हटाया है, लेकिन NCPCR इन दलीलों से संतुष्ट नहीं है। आयोग ने कंपनी से उनके मॉडरेशन प्रोटोकॉल और सुरक्षा प्रणालियों पर कड़े जवाब मांगे हैं।
रेगुलेटरी और ऑपरेशनल जोखिम
निवेशकों के लिए यह घटना बड़ी चेतावनी है। Meta एक तरफ अपने AI इंफ्रास्ट्रक्चर और Reality Labs पर भारी निवेश कर रही है, जिससे मार्जिन पर पहले ही दबाव है, वहीं दूसरी ओर उसे भारत जैसे महत्वपूर्ण मार्केट में सख्त अनुपालन (Compliance) का सामना करना पड़ रहा है। यदि कंटेंट मॉडरेशन के लिए और अधिक खर्च बढ़ाना पड़ा, तो यह कंपनी के मुनाफे पर सीधा असर डाल सकता है।
आगे की राह
मार्केट की नजर अब इस बात पर है कि क्या सरकार कंपनी पर कोई बड़ा जुर्माना लगाती है या कोई सख्त नीतिगत बदलाव करती है। फिलहाल, कंपनी के लिए बड़ी चुनौती यह है कि वह अपने भारी-भरकम AI निवेश और लोकल सेफ्टी मानकों के बीच कैसे तालमेल बिठाती है।
