Meta Platforms के लिए मुश्किलें बढ़ गई हैं। दिल्ली के एक निवासी ने कंपनी को **₹2.05 करोड़** का लीगल नोटिस भेजा है, जिसमें Ray-Ban स्मार्ट ग्लासेस से बिना अनुमति रिकॉर्डिंग का आरोप लगाया गया है। यह विवाद ऐसे समय में आया है जब कंपनी पहले से ही अमेरिका में **$16.68 बिलियन** के भारी-भरकम सेटलमेंट के दबाव में है।
मामला क्या है?
दिल्ली के एक निवासी ने Meta को यह नोटिस तब भेजा जब एक इंस्टाग्राम यूजर ने Ray-Ban Meta स्मार्ट ग्लासेस का उपयोग करके उन्हें बिना उनकी सहमति के रिकॉर्ड किया और वह फुटेज प्लेटफॉर्म पर साझा कर दी। शिकायतकर्ता का कहना है कि रिपोर्ट करने के बावजूद Meta का ग्रीवेंस रिड्रेसल सिस्टम पूरी तरह विफल रहा।
निवेशकों के लिए क्या है रिस्क?
स्मार्ट वियरेबल्स के डिजाइन को लेकर अब गंभीर सवाल उठ रहे हैं। चूंकि ये ग्लासेस साधारण चश्मों जैसे ही दिखते हैं, इसलिए लोगों को यह पता नहीं चलता कि उन्हें रिकॉर्ड किया जा रहा है या नहीं। यदि रेगुलेटर्स इन डिवाइसेस के लिए कड़े नियम बनाते हैं—जैसे रिकॉर्डिंग इंडिकेटर को और ज्यादा स्पष्ट करना—तो इससे कंपनी की सेल्स और ब्रांड वैल्यू पर बुरा असर पड़ सकता है।
ग्लोबल मार्केट पर दबाव
भारत का यह केस कंपनी की बड़ी समस्याओं का एक हिस्सा मात्र है। हाल ही में 26 अगस्त, 2026 को Meta ने अमेरिका के 29 राज्यों में युवाओं की सोशल मीडिया एडिक्शन से जुड़े मुकदमों को खत्म करने के लिए $16.68 बिलियन का भुगतान करने पर सहमति जताई है। चालू तिमाही में ही कंपनी को इसके चलते लगभग $10 बिलियन का कानूनी खर्च उठाना पड़ सकता है, जो कंपनी के कैश फ्लो पर भारी दबाव डाल रहा है।
इंटरनेशनल स्क्रूटनी
जर्मनी और फ्रांस के रेगुलेटर्स ने भी इन स्मार्ट ग्लासेस की प्राइवेसी को लेकर चिंता जताई है। कुछ अधिकारियों ने तो सार्वजनिक जगहों पर इन डिवाइसेस को बैन करने तक का सुझाव दिया है। निवेशक अब बारीकी से नजर रख रहे हैं कि इन कानूनी खर्चों का कंपनी के बिजनेस मॉडल पर कितना असर पड़ेगा और क्या उन्हें भविष्य में अपने हार्डवेयर के संचालन में अनिवार्य बदलाव करने होंगे।
