Meta Platforms एक बार फिर मुश्किलों में है। कंपनी के प्लेटफॉर्म पर AI से बने आपत्तिजनक विज्ञापनों का पता चलने के बाद, NCPCR ने Meta India के लीडरशिप को जवाब-तलब किया है।
भारी रेगुलेटरी दबाव में Meta
हाल ही में सामने आई रिपोर्टों के मुताबिक, Facebook और Instagram के विज्ञापन सिस्टम में 300 से ज्यादा ऐसे विज्ञापन देखे गए जिनमें AI के जरिए बनाई गई आपत्तिजनक सामग्री थी। इस मामले ने न केवल सुरक्षा प्रोटोकॉल पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि भारत में कानूनी घेरा भी कस दिया है। नेशनल कमीशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट्स (NCPCR) ने कंपनी के पिछले जवाबों को नाकाफी मानते हुए Meta India के हेड अरुण श्रीनिवास को 9 सितंबर, 2026 को पेश होने का समन भेजा है।
क्या है डेटा और रिस्क?
Tech Transparency Project की रिपोर्ट के अनुसार, यह सामग्री करीब 29,000 ग्लोबल यूजर्स तक पहुंची। यह घटना कंपनी के ऑटोमेटेड कंटेंट मॉडरेशन सिस्टम की खामियों को उजागर करती है। हालांकि Meta ने इन विज्ञापनों को हटाने की पुष्टि की है, लेकिन यह मामला उसके रेवेन्यू मॉडल और कंटेंट मॉडरेशन के बीच के तालमेल पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।
फाइनेंशियल सेहत पर असर
निवेशकों की चिंता के पीछे कुछ ठोस फाइनेंशियल आंकड़े हैं। Meta ने Q2 2026 में $60.80 बिलियन का रेवेन्यू दर्ज किया, जो सालाना आधार पर 28% की बढ़ोतरी है। लेकिन, सिक्के का दूसरा पहलू यह है कि कंपनी का ऑपरेटिंग मार्जिन 43% से घटकर 31% पर आ गया है। इस दबाव का मुख्य कारण AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर किया जा रहा भारी-भरकम कैपिटल खर्च है।
इसके अलावा, कंपनी के पास $58.7 बिलियन का लंबा कर्ज (Long-term debt) भी है। अगर रेगुलेटरी बॉडीज भविष्य में कड़े नियम या भारी जुर्माना लगाती हैं, तो यह कंपनी की फाइनेंशियल फ्लेक्सिबिलिटी पर और दबाव डाल सकता है। अब बाजार की नजर इस बात पर है कि क्या Meta अपने मुनाफे को बचाते हुए इन सुरक्षा चुनौतियों का समाधान निकाल पाएगी या नहीं।
