टेक दिग्गज Meta पर **26** पूर्व कर्मचारियों ने AI का इस्तेमाल कर उन लोगों को नौकरी से निकालने का आरोप लगाया है जो छुट्टी पर थे। कंपनी ने इन दावों को ख़ारिज करते हुए कहा है कि ये फैसले इंसानों द्वारा लिए गए थे, न कि एल्गोरिदम द्वारा।
AI पर लगे नौकरी से निकालने के आरोप
Meta Platforms Inc. इस वक्त एक बड़े कानूनी शिकंजे में फंस गई है। कंपनी के 26 पूर्व कर्मचारियों ने आरोप लगाया है कि Meta ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का गलत इस्तेमाल करके छंटनी (layoff) के लिए कर्मचारियों को चुना। यह मुकदमा कैलिफोर्निया के ओकलैंड में एक फेडरल कोर्ट में दायर किया गया है। इन कर्मचारियों का कहना है कि कंपनी ने पिछले मई में जो छंटनी की, उसमें उन लोगों को निशाना बनाया गया जो मेडिकल, फैमिली या पैरेंटल लीव पर थे।
AI का खेल या इंसानी भूल?
मुकदमे के मुताबिक, Meta ने AI-संचालित परफॉरमेंस मेट्रिक्स, जैसे एक्टिविटी डेटा और कीस्ट्रोक मॉनिटरिंग का इस्तेमाल करके कर्मचारियों को रैंक किया। लेकिन, कोर्ट फाइलिंग के अनुसार, इन ऑटोमेटेड सिस्टम ने यह ध्यान नहीं रखा कि कर्मचारी छुट्टी पर थे। वादी (plaintiffs) का तर्क है कि छुट्टी पर होने के कारण, उन कर्मचारियों का आउटपुट स्वाभाविक रूप से कम था, जिससे AI द्वारा जनरेट किए गए स्कोर में उन्हें नुकसान हुआ और छंटनी की संभावना बढ़ गई। पूर्व कर्मचारियों के कानूनी दल का दावा है कि इससे लीव स्टेटस और उचित व्यवस्थाओं (reasonable accommodations) को ध्यान में रखकर व्यक्तिगत समीक्षा (individualized reviews) करने की ज़रूरतों का उल्लंघन हुआ है।
कानूनी दांव-पेंच और कंपनी का जवाब
इस शिकायत में अमेरिकन्स विद डिसएबिलिटीज एक्ट (Americans with Disabilities Act), प्रेग्नेंसी डिस्क्रिमिनेशन एक्ट (Pregnancy Discrimination Act) और फैमिली एंड मेडिकल लीव एक्ट (Family and Medical Leave Act) जैसे कई संघीय नियमों के उल्लंघन का दावा किया गया है। वकीलों का कहना है कि भले ही छंटनी की नीति तटस्थ (neutral) दिखती हो, लेकिन इसके अमल ने कुछ खास समूहों, खासकर देखभाल या मेडिकल लीव लेने वालों को अनुचित रूप से दंडित किया।
Meta ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। कंपनी ने अपने जवाब में कहा है कि उसके कार्यबल से जुड़े सभी संगठनात्मक फैसले इंसानों द्वारा ही लिए गए थे और आगे भी लिए जाएंगे, न कि AI सिस्टम द्वारा। कंपनी ने मुकदमे को निराधार बताया है।
निवेशकों के लिए क्या है मायने?
हालांकि इस मुकदमे का सीधा वित्तीय प्रभाव अभी स्पष्ट नहीं है, लेकिन यह मामला इस बात पर प्रकाश डालता है कि बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियां मानव संसाधन और प्रबंधन में ऑटोमेटेड टूल्स को कैसे एकीकृत कर रही हैं। निवेशकों के लिए, मुख्य बात यह है कि कानूनी कार्यवाही का नतीजा क्या निकलता है और क्या कोर्ट वादी की रोज़गार की स्थिति यथावत बनाए रखने के अनुरोध को स्वीकार करता है।
इसके अलावा, AI-संचालित कॉर्पोरेट नीतियों की पारदर्शिता और पूर्वाग्रह (bias) को लेकर पूरे टेक सेक्टर पर नज़रों की जासूसी हो रही है। अगर अदालत के फैसलों में रोज़गार संबंधी निर्णयों में तकनीक के अनुचित उपयोग का संकेत मिलता है, तो Meta और अन्य टेक फर्मों पर AI टूल्स के इस्तेमाल को लेकर रेगुलेटरी दबाव बढ़ सकता है। अगली बड़ी खबर अदालत का वह फैसला होगा जो वादी की रोज़गार स्थिति को बनाए रखने के संबंध में होगा, जो आगे की कानूनी कार्यवाही की गति और दिशा तय कर सकता है।
