Meta Platforms: PM मोदी के वीडियो पर गड़बड़ी, अब IT पैनल के सवालों के घेरे में

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AuthorNeha Patil|Published at:
Meta Platforms: PM मोदी के वीडियो पर गड़बड़ी, अब IT पैनल के सवालों के घेरे में

Meta Platforms ने भारत सरकार से माफी मांगी है। कंपनी के Facebook पर एक तकनीकी गड़बड़ी के कारण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक वीडियो गलती से हटा दिया गया था। इस घटना के बाद सरकार का ध्यान इस ओर गया है, और Meta को 3 अगस्त को एक संसदीय पैनल के सामने पेश होना होगा, जहाँ यूजर प्राइवेसी और पब्लिक आर्डर पर चर्चा होगी।

Detailed Coverage

Meta की गलती, सरकार की चिंता?

Meta Platforms ने मंगलवार को भारतीय सरकार से औपचारिक माफी मांगी है। कंपनी ने स्वीकार किया है कि एक तकनीकी खराबी के चलते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक वीडियो गलती से Facebook से हटा दिया गया था। हालांकि, कंपनी का कहना है कि यह एक गलती थी और वीडियो को अब वापस प्लेटफॉर्म पर ला दिया गया है।

सरकारी अधिकारी इस घटना की जांच कर रहे हैं कि आखिर यह गलती कैसे हुई। ऐसे भी कयास लगाए जा रहे हैं कि Meta के प्रतिनिधियों को इस मामले में और स्पष्टीकरण देने के लिए बुलाया जा सकता है।

3 अगस्त को संसदीय पैनल के सामने पेश होंगे टेक दिग्गज

यह घटना ऐसे समय में हुई है जब सूचना प्रौद्योगिकी और संचार संबंधी संसदीय स्थायी समिति की एक अहम बैठक 3 अगस्त को होने वाली है। इस पैनल ने Meta (जिसके तहत Facebook, Instagram और WhatsApp आते हैं) के साथ-साथ Google, Snapchat और X जैसी बड़ी टेक कंपनियों के प्रतिनिधियों को बुलाया है।

इस बैठक का मुख्य एजेंडा यह जांचना है कि ये टेक कंपनियां यूजर प्राइवेसी की सुरक्षा कैसे करती हैं और पब्लिक आर्डर को कैसे बनाए रखती हैं। पैनल बच्चों, महिलाओं, किसानों और ग्रामीण निवासियों जैसे विभिन्न समूहों की सुरक्षा पर भी खास ध्यान देगा। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय और गृह मंत्रालय के प्रतिनिधि भी इन चर्चाओं में शामिल होंगे।

सोशल मीडिया पर बढ़ता रेगुलेटरी फोकस

यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल, खासकर सूचनाओं के प्रवाह और लोगों को एकजुट करने में उनकी भूमिका को लेकर, गहन जांच के दायरे में है। हाल ही में NEET-UG परीक्षा पेपर लीक जैसे मामलों में Instagram जैसे प्लेटफॉर्म्स पर विरोध प्रदर्शनों को आयोजित करने और प्रचारित करने के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल देखा गया।

इस वजह से, रेगुलेटर्स इन कंपनियों से उनकी कंटेंट मॉडरेशन नीतियों और स्थानीय नियमों के पालन के बारे में अधिक पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं। निवेशक और जानकार 3 अगस्त की बैठक के नतीजों पर बारीकी से नजर रखेंगे, क्योंकि नियमों में कोई भी बदलाव इन कंपनियों के संचालन, कंटेंट प्रबंधन और भारतीय बाजार में उनकी उपस्थिति को प्रभावित कर सकता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.