Meta ने Facebook और Instagram पर भ्रामक विज्ञापनों को रोकने के लिए नए AI-संचालित टूल पेश किए हैं। जनवरी से जून 2026 के बीच कंपनी ने भारत में **53 लाख** हानिकारक कंटेंट हटाए हैं, हालांकि बढ़ते खर्च और सरकारी सख्ती ने निवेशकों की चिंता भी बढ़ा दी है।
AI से विज्ञापन सुरक्षा में बड़ी पहल
Meta ने अब विज्ञापनों की निगरानी के लिए पारंपरिक तरीकों से हटकर एडवांस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल शुरू किया है। कंपनी अब 'लार्ज लैंग्वेज मॉडल्स' के जरिए विज्ञापनों के पीछे के इरादे (intent) को समझ रही है, न कि सिर्फ उनकी बनावट को। इससे उन हानिकारक विज्ञापनों को रोकने में मदद मिली है जो ऊपर से सुरक्षित दिखते हैं लेकिन अवैध वेबसाइटों की ओर ले जाते हैं।
भारत में कार्रवाई का पैमाना
कंपनी के आंकड़ों के अनुसार, जनवरी से जून 2026 के बीच 53 लाख से ज्यादा आपत्तिजनक कंटेंट को प्लेटफॉर्म से हटाया गया है। राहत की बात यह है कि इसमें से 98% कंटेंट को ऑटोमेटेड सिस्टम ने यूजर की शिकायत मिलने से पहले ही पकड़ लिया। सुरक्षा को मजबूत करने के लिए Meta ने 'नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल' के साथ सीधा पाइपलाइन भी स्थापित की है ताकि साइबर अपराधों पर तुरंत एक्शन लिया जा सके।
निवेशकों के लिए चेतावनी और अवसर
इन सुरक्षा फीचर्स का सीधा असर कंपनी के ऑपरेशनल खर्च पर पड़ रहा है। अनुमान है कि 2027 तक कंपनी का खर्च $215 बिलियन तक पहुंच सकता है। इसके अलावा, भारत में Meta की 'इंटरमीडियरी' वर्सेस 'सर्विस प्रोवाइडर' वाली कानूनी स्थिति भी एक बड़ा मुद्दा है। यदि सरकार के नियमों में बदलाव आता है, तो कंपनी की अनुपालन लागत (compliance cost) और बढ़ सकती है।
बाजार का मिजाज फिलहाल सकारात्मक है। 7 अक्टूबर 2026 को Meta का शेयर $738.88 पर बंद हुआ था और कई एनालिस्ट्स ने इसका टारगेट $1,000 तक रखा है। निवेशकों की नजर इस पर होगी कि क्या कंपनी अपनी प्रॉफिट मार्जिन को सुरक्षित रखते हुए इन सुरक्षा मानकों को बनाए रख पाती है या नहीं।
