Meta का Muse AI टूल विवादों में, कंपनी ने डेटा प्राइवेसी पर दी सफाई

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AuthorNeha Patil|Published at:
Meta का Muse AI टूल विवादों में, कंपनी ने डेटा प्राइवेसी पर दी सफाई

Meta Platforms अपने Muse AI एजेंट को लेकर उठे सवालों का जवाब दे रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह टूल बिना अनुमति के निजी मैसेज एक्सेस कर रहा था, जिसे कंपनी ने सिरे से खारिज किया है। निवेशकों की नजरें अब इस बात पर हैं कि प्राइवेसी से जुड़ी ये चिंताएं कंपनी की साख और रेगुलेटरी जांच पर कितना असर डालेंगी।

प्राइवेसी पर कंपनी का रुख

Meta ने स्पष्ट किया है कि Muse AI एक पूरी तरह से 'ऑप्ट-इन' फीचर है। बिना यूजर की अनुमति और मैन्युअल सेटिंग के यह टूल निजी डेटा से छेड़छाड़ नहीं कर सकता। Mac सिस्टम के लिए बनाई गई इस तकनीक में 2 स्तर की सिक्योरिटी लेयर्स जोड़ी गई हैं।

कैसे काम करती है सुरक्षा?

कंपनी के अधिकारियों के अनुसार, यूजर को खुद 'Full Disk Access' सेटिंग इनेबल करनी होती है और Messages ऐप के लिए कनेक्टर्स को मैन्युअल तरीके से कॉन्फ़िगर करना पड़ता है। बिना सिस्टम सेटिंग में गए और परमिशन दिए, सॉफ्टवेयर का निजी डेटा तक पहुंचना तकनीकी रूप से नामुमकिन है।

'हैलुसिनेशन' की थ्योरी

विवाद तब शुरू हुआ जब AI के बारे में दावा किया गया कि वह परमिशन बंद होने के बाद भी मैसेज पढ़ रहा है। कुछ लोगों ने तर्क दिया कि AI नोटिफिकेशन बैनर को इंटरसेप्ट कर रहा है, लेकिन Meta ने इसे खारिज कर दिया। कंपनी का कहना है कि यह AI का 'हैलुसिनेशन' हो सकता है, जहां AI मॉडल गलत या भ्रामक जानकारी दे देता है।

निवेशकों के लिए चुनौतियां

यह मामला ऐसे समय में आया है जब Meta पहले से ही डेटा हैंडलिंग के लिए कानूनी सवालों के घेरे में है। हाल ही में न्यू मैक्सिको की एक जूरी ने कंपनी को डेटा प्रथाओं को लेकर गलत जानकारी देने का दोषी पाया था। इसके अलावा, Facebook Marketplace से जुड़े एक अन्य मामले में भी कंपनी जांच कर रही है। इन्वेस्टर्स के लिए बड़ी चिंता यह है कि क्या कंपनी का AI स्ट्रैटेजी भविष्य में और कानूनी या रेगुलेटरी सख्ती को न्योता देगी या नहीं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.