Meta Platforms एक बार फिर मुश्किलों में घिर गई है। कंपनी का AI चैटबॉट एक नाबालिग की संवेदनशील जानकारी साझा करने के आरोपों के कारण सुर्खियों में है। अगस्त 2026 में हुए **$16.68 बिलियन** के सेटलमेंट के बाद यह नई घटना निवेशकों के लिए रेगुलेटरी रिस्क और डेटा प्राइवेसी पर चिंताएं बढ़ा रही है।
डेटा में चूक और रेगुलेटरी दबाव
हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार, Meta का AI चैटबॉट सोशल मीडिया पोस्ट्स से बिखरे हुए डेटा को जोड़कर एक नाबालिग की निजी जानकारियां, जैसे कि जन्म विवरण और लोकेशन, सामने लाने में सक्षम पाया गया। हालांकि कंपनी ने उन फीचर्स को बंद कर दिया है, लेकिन यह मामला ग्लोबल रेगुलेटर्स, जैसे कि EU का 'डिजिटल सर्विसेज एक्ट' और 'GDPR' के लिए एक बड़ी चुनौती है। अगस्त 2026 में चाइल्ड सेफ्टी को लेकर कंपनी पहले ही $16.68 बिलियन का भारी जुर्माना भर चुकी है, ऐसे में बार-बार सामने आ रहे प्राइवेसी मुद्दे कंपनी के कंप्लायंस खर्च को और बढ़ा सकते हैं।
AI स्पेंडिंग और कंपनी के मार्जिन पर असर
Meta इस समय अपने 'Muse' AI एजेंट और अन्य टूल्स के लिए $130 बिलियन से लेकर $145 बिलियन तक का भारी-भरकम कैपिटल एक्सपेंडिचर कर रही है। Goldman Sachs और JPMorgan जैसे दिग्गज ब्रोकरेज हाउस भले ही इस पर पॉजिटिव हों, लेकिन सुरक्षा में चूक होने पर कंपनी को डेवलपमेंट की रफ्तार धीमी करनी पड़ सकती है। यदि सुरक्षा प्रोटोकॉल पर ज्यादा खर्च करना पड़ा, तो इसका सीधा असर कंपनी के प्रॉफिट मार्जिन पर पड़ सकता है।
निवेशकों के लिए आगे क्या है?
NASDAQ में लिस्टेड Meta का शेयर अभी $648 से $660 की रेंज में मजबूती दिखा रहा है, लेकिन मार्केट में इसे लेकर सतर्कता बनी हुई है। आने वाली तिमाही नतीजों में मैनेजमेंट क्या 'सेफ्टी इंफ्रास्ट्रक्चर' पर सफाई देता है, यह शेयर की दिशा तय करेगा। निवेशकों को यह देखना होगा कि कंपनी कैसे अपने AI प्रोडक्ट्स को स्केल करती है और डेटा प्राइवेसी के मोर्चे पर कानूनी दांव-पेच से कैसे खुद को बचाती है।
