Meta Platforms के नए AI असिस्टेंट 'Muse' ने महज **40** दिनों में **1.09 करोड़** डाउनलोड्स का आंकड़ा छू लिया है, जिसमें **1.02 करोड़** इंस्टॉल सिर्फ अमेरिकी बाजार से आए हैं। हालांकि, भारी विज्ञापन खर्च से ग्रोथ तो दिख रही है, लेकिन निवेशकों की नजर अब कंपनी के प्रॉफिट मार्जिन पर है।
आक्रामक मार्केटिंग का असर
इस शानदार ग्रोथ के पीछे Meta की आक्रामक मार्केटिंग रणनीति है। कंपनी ने अक्टूबर में अपने कुल विज्ञापन बजट का 39% हिस्सा अकेले Muse के प्रमोशन पर खर्च किया है, जो सितंबर में महज 23% था। कंपनी के पास 3.6 अरब डेली एक्टिव यूजर्स का अपना विशाल इकोसिस्टम है, जिसका फायदा इस ऐप को मिल रहा है।
रिटेंशन में दिग्गजों को पछाड़ा
Sensor Tower के डेटा के मुताबिक, Muse की 'यूजर स्टिकिनेस' यानी ऐप में बने रहने की दर काफी मजबूत है। Muse का 7 दिनों के बाद का रिटेंशन रेट 30% और 14 दिनों बाद 23% दर्ज किया गया है। इसकी तुलना में ChatGPT, Claude और Grok का रिटेंशन रेट औसतन 19% और 16% के आसपास है।
निवेशकों के लिए जोखिम और चुनौतियां
शेयरधारकों के लिए चिंता का विषय 'कॉस्ट ऑफ एक्विजिशन' है। इतनी बड़ी रकम विज्ञापन पर खर्च करने से प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव आ सकता है। अभी यह ऐप मुख्य रूप से अमेरिकी बाजार तक सीमित है। ऐसे में सवाल यह है कि क्या मार्केटिंग का यह खर्च कम होने पर भी यूजर्स ऐप से जुड़े रहेंगे और क्या कंपनी इस प्रोडक्ट को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसी तरह सफल बना पाएगी?
