Memory Chip Prices: AI की डिमांड से स्मार्टफोन कंपनियां बेहाल, बजट फोन्स पर बढ़ा महंगाई का खतरा

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AuthorNeha Patil|Published at:
Memory Chip Prices: AI की डिमांड से स्मार्टफोन कंपनियां बेहाल, बजट फोन्स पर बढ़ा महंगाई का खतरा

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की बढ़ती डिमांड के चलते मेमोरी कंपोनेंट्स की कीमतें तीन गुना हो गई हैं। इससे सस्ते स्मार्टफोन बनाने वाली कंपनियों के मुनाफे पर सीधा असर पड़ रहा है और ग्राहकों को अब बढ़ी हुई कीमतों का सामना करना पड़ सकता है।

AI इंफ्रास्ट्रक्चर के तेजी से विस्तार ने स्मार्टफोन इंडस्ट्री के सामने एक बड़ा सप्लाई क्रंच खड़ा कर दिया है। चिप निर्माता कंपनियां अब अपना ध्यान AI डेटा सेंटर्स के लिए हाई-वैल्यू मेमोरी कंपोनेंट्स पर केंद्रित कर रही हैं, जिससे आम इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए आपूर्ति कम हो गई है। डेटा के मुताबिक, स्मार्टफोन मैन्युफैक्चरर्स के लिए प्रति यूनिट मेमोरी की लागत 2025 से अब तक 3 गुना बढ़ गई है, जो $20 से बढ़कर अब $60 के पार पहुंच गई है।

बजट सेगमेंट पर सबसे ज्यादा मार

प्रीमियम फोन्स के मुकाबले बजट सेगमेंट पर इसका असर कहीं ज्यादा गंभीर है। $200 से कम कीमत वाले एंट्री-लेवल स्मार्टफोन में मेमोरी कंपोनेंट्स कुल लागत का लगभग 60% हिस्सा होते हैं। कम मार्जिन पर काम करने वाली कंपनियों के लिए इन बढ़ी हुई लागतों को झेल पाना बेहद मुश्किल हो गया है।

कंपनियों की बदलती रणनीति

इस दबाव को कम करने के लिए मोबाइल कंपनियां अब बजट मॉडल्स की संख्या कम कर रही हैं और पुराने, सस्ते सेमीकंडक्टर चिप्स का इस्तेमाल बढ़ा रही हैं। हालांकि, ये कदम ग्राहकों के लिए स्मार्टफोन की अपील को कम कर सकते हैं। अगर कंपनियां इन बढ़ी हुई लागतों का बोझ ग्राहकों पर डालती हैं, तो जानकारों का मानना है कि स्मार्टफोन की बिक्री में गिरावट आ सकती है, क्योंकि ग्राहक या तो पुराने फोन इस्तेमाल करना जारी रखेंगे या फिर सेकेंड-हैंड मार्केट का रुख करेंगे।

प्रमुख ब्रांड्स पर असर

यह बदलाव Xiaomi, OPPO, vivo और Transsion जैसी उन कंपनियों के लिए सबसे ज्यादा चुनौतीपूर्ण है, जिनकी बिक्री का बड़ा हिस्सा मास-मार्केट और एंट्री-लेवल सेगमेंट से आता है। Apple और Samsung जैसी प्रीमियम-फोक्स्ड कंपनियों के पास मार्जिन बनाए रखने के लिए अधिक लचीलापन है, जबकि मास-मार्केट प्लेयर्स के लिए कंपोनेंट की कीमतों में उतार-चढ़ाव बड़ी मुसीबत बन गया है।

अब निवेशकों की नजर इस पर है कि क्या ये कंपनियां अपने मार्केट शेयर को बचाए रखते हुए मुनाफे को बरकरार रख पाएंगी। विश्लेषक 2026 और 2027 में ग्लोबल शिपमेंट वॉल्यूम में गिरावट की संभावना जता रहे हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.