इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) WhatsApp, Telegram और Signal से उनके Username फीचर को लेकर जवाबों की समीक्षा कर रहा है। सरकार यह जांच रही है कि कहीं ये फीचर गुमनाम रूप से पहचान चुराने (impersonation) की सुविधा तो नहीं देते। सभी प्लेटफॉर्म्स की सुरक्षा उपायों की विस्तृत जांच के बाद ही कोई अंतिम फैसला लिया जाएगा।
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) इस वक्त WhatsApp, Telegram और Signal जैसे मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स के Username-आधारित फीचर्स की समीक्षा कर रहा है। सरकार ने इन प्लेटफॉर्म्स को नोटिस भेजकर यह बताने को कहा था कि वे ऑनलाइन फ्रॉड, फिशिंग स्कैम और यूजर की पहचान चुराने (impersonation) जैसी सुरक्षा खामियों को कैसे रोकेंगे। मुख्य चिंता का विषय यह है कि यूजर्स अपने मोबाइल नंबर बताए बिना भी इन प्लेटफॉर्म्स पर बातचीत कर सकते हैं, जिसे मंत्रालय साइबर अपराध के लिए गुमनाम माहौल बनाने वाला मान रहा है।
सरकारी जांच प्रक्रिया और प्लेटफॉर्म्स के जवाब
IT सचिव एस कृष्णन ने पुष्टि की है कि सरकार को मैसेजिंग सर्विस प्रोवाइडर्स से ज़रूरी स्पष्टीकरण मिल गया है और अब वह इसकी गहन जांच कर रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन कंपनियों को यह जानकारी देने के लिए 7 से 10 दिनों का समय दिया गया था। हालांकि मंत्रालय ने अभी कोई पक्का रुख नहीं अपनाया है, लेकिन यह समीक्षा महत्वपूर्ण है क्योंकि इसी पर तय होगा कि क्या ये प्लेटफॉर्म्स Username के ज़रिए लोगों को जोड़ने वाले फीचर्स को जारी रख पाएंगे या लॉन्च कर पाएंगे।
Meta (Facebook) की WhatsApp, जिसके भारत में करीब 50 करोड़ यूजर्स हैं, उसे 1 जुलाई को पहला नोटिस मिला था। इस नोटिस के बाद कंपनी को सरकारी सलाह-मशविरे पूरे होने तक अपने Username फीचर की लॉन्चिंग रोकने को कहा गया था। Telegram और Signal ने भी अपने मौजूदा Username फंक्शनलिटीज और पहचान चुराने व फ्रॉड से बचाने के लिए उनके सिस्टम में मौजूद सुरक्षा प्रोटोकॉल के बारे में जानकारी दी है।
प्लेटफॉर्म्स की रणनीति पर संभावित असर
निवेशकों और मार्केट पर नजर रखने वालों के लिए यह रेगुलेटरी जांच एक अहम खबर है। मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स लगातार यूजर प्राइवेसी को बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं, जिसमें मोबाइल नंबर की बजाय Username का इस्तेमाल शामिल है। इसे अक्सर यूजर एक्सपीरियंस और सुरक्षा को बेहतर बनाने का तरीका माना जाता है। लेकिन, सरकारी हस्तक्षेप प्राइवेसी फीचर्स और साइबर अपराध को रोकने के लिए जवाबदेही की ज़रूरत के बीच एक बार फिर टकराव को दिखाता है।
अगर सरकार सख्त पहचान वेरिफिकेशन (identity verification) की मांग करती है या Username के इस्तेमाल को सीमित करती है, तो इन कंपनियों को भारतीय बाजार में अपने प्रोडक्ट रोडमैप बदलने या महंगे सुरक्षा उपाय लागू करने पड़ सकते हैं। अंतिम फैसला यह भी संकेत देगा कि सरकार गुमनामी को प्राथमिकता देने वाली अन्य कम्युनिकेशन सर्विसेज को कैसे रेगुलेट करने की योजना बना रही है। निवेशकों को मंत्रालय की आधिकारिक घोषणा पर नज़र रखनी चाहिए, जो इन फीचर्स के लिए ऑपरेटिंग गाइडलाइन्स को स्पष्ट करेगी और यह भी बताएगी कि WhatsApp की लॉन्चिंग पर लगी रोक हटेगी या बढ़ाई जाएगी।
