Meesho ने जून तिमाही के नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी का नेट लॉस (Net Loss) 54% घटकर ₹132.8 करोड़ रह गया, जबकि रेवेन्यू (Revenue) 48% बढ़कर ₹3,712.8 करोड़ हो गया। AI के इस्तेमाल से कंपनी ने 725 मिलियन ऑर्डर प्रोसेस किए।
Detailed Coverage
Meesho के नतीजे: मुनाफे की राह पर कंपनी?
'वैल्यू कॉमर्स' प्लेटफॉर्म Meesho ने 2026-27 के फाइनेंशियल ईयर की पहली तिमाही के नतीजे पेश किए हैं। कंपनी ने घाटे को कम करने और रेवेन्यू बढ़ाने का शानदार ट्रेंड दिखाया है। जून तिमाही में कंपनी का नेट लॉस घटकर ₹132.8 करोड़ रहा, जो पिछले साल की इसी अवधि में ₹289.4 करोड़ था। यानी, घाटे में 54% की बड़ी कमी आई है। वहीं, कंपनी का रेवेन्यू 48% की जोरदार उछाल के साथ ₹3,712.8 करोड़ पर पहुंच गया, जो पिछले साल ₹2,503.9 करोड़ था।
ऑपरेशनल खर्च और AI का असर
जहां कंपनी का रेवेन्यू बढ़ा है, वहीं कुल खर्चे भी 43% बढ़कर ₹3,959.2 करोड़ हो गए। मैनेजमेंट का कहना है कि ईंधन की बढ़ती कीमतें और न्यूनतम मजदूरी में बढ़ोतरी इसकी मुख्य वजहें रहीं। इन सबके बावजूद, कंपनी का कॉन्ट्रिब्यूशन मार्जिन (Contribution Margin) 4.6% रहा। यह ई-कॉमर्स कंपनियों के लिए एक अहम इंडिकेटर है, जो डिलीवरी, पैकेजिंग और मार्केटिंग जैसे डायरेक्ट खर्चों को हटाने के बाद हर ऑर्डर पर मुनाफे को मापता है।
AI (Artificial Intelligence) में किए गए निवेश से कंपनी को काफी फायदा हुआ है। कैटलॉगिंग, डिमांड फोरकास्टिंग और मल्टीलिंगुअल वॉयस एजेंट में AI टूल्स का इस्तेमाल किया गया। इन टूल्स की मदद से कंपनी ने तिमाही के दौरान करीब 725 मिलियन ऑर्डर प्रोसेस किए, यानी हर सेकंड 90 से ज्यादा ऑर्डर। टेक्नोलॉजी पर आधारित इस अप्रोच से कंपनी के सेलर्स की संख्या भी बढ़ी है, जो 81% बढ़कर 10.4 लाख से ज्यादा हो गई है।
मार्केट पोजीशन और फाइनेंशियल हेल्थ
Meesho का फोकस वैल्यू-कॉन्शियस कंज्यूमर्स पर है, जो कि Amazon India, Flipkart और नई क्विक-कॉमर्स फर्म्स से इसे अलग करता है। कंपनी का मार्केटप्लेस-एडजस्टेड EBITDA (एक खास तरह का ऑपरेटिंग प्रॉफिट) नेट मर्चेंडाइज वैल्यू का -1.2% रहा। इसके अलावा, पिछले 12 महीनों में फ्री कैश फ्लो (Free Cash Flow) में 15% का सुधार देखने को मिला है, जो कंपनी की फाइनेंशियल स्टेबिलिटी की ओर इशारा करता है।
हालांकि, Meesho को कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है। कंपनी के लिए आगे की चुनौती यह होगी कि वो अपने कॉन्ट्रिब्यूशन मार्जिन को कैसे बेहतर बनाए रखती है और अपने AI-संचालित इकोसिस्टम को बढ़ाते हुए कुल कैश बर्न (Cash Burn) को कैसे कम करती है।
