AI से असली मुनाफा तभी, जब कंपनी बदले अपनी कार्यप्रणाली: McKinsey रिपोर्ट

TECHNOLOGY
Whalesbook Logo
AuthorNeha Patil|Published at:
AI से असली मुनाफा तभी, जब कंपनी बदले अपनी कार्यप्रणाली: McKinsey रिपोर्ट

McKinsey की नई रिसर्च बताती है कि AI का असली बिजनेस वैल्यू सिर्फ कर्मचारियों के इस्तेमाल से नहीं, बल्कि कंपनी के वर्कफ़्लो को फिर से डिजाइन करने से आता है। फिलहाल सिर्फ **11%** ऑर्गनाइजेशन 'रीइन्वेंशन' स्टेज पर हैं, जहां सबसे ज्यादा रिटर्न की संभावना है। यह व्यक्तिगत और संगठनात्मक तैयारी के बीच का अंतर दिखाता है कि टेक्नोलॉजी जितनी महत्वपूर्ण है, लीडरशिप और कल्चर भी उतने ही जरूरी हैं।

AI का वादा और हकीकत: क्यों नहीं मिल रहा कंपनियों को मुनाफा?

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की कॉर्पोरेट दुनिया में धूम तो है, लेकिन नई रिसर्च बताती है कि ज्यादातर कंपनियां इस टेक्नोलॉजी को अपनाकर भी खास फाइनेंशियल रिजल्ट्स हासिल नहीं कर पा रही हैं। McKinsey & Company की एक रिपोर्ट के अनुसार, AI से सबसे बड़ा फायदा सिर्फ कर्मचारियों को टूल्स देने से नहीं, बल्कि कंपनी के काम करने के तरीके, वर्कफ़्लो और रोजमर्रा के कामों को मौलिक रूप से बदलने से होता है।

टेक्नोलॉजी और अमल के बीच की खाई

2026 की शुरुआत में 750 कर्मचारियों और बिजनेस लीडर्स के बीच हुए सर्वे में सामने आया है कि जहां 70% लोग AI टूल्स इस्तेमाल करने में कॉन्फिडेंट महसूस करते हैं, वहीं एक-तिहाई से भी कम लीडर मानते हैं कि उनके ऑर्गनाइजेशन इस बदलाव के लिए तैयार हैं। यह गैप दिखाता है कि कई कंपनियां अभी शुरुआती दौर में हैं, जहां टेक्नोलॉजी तो मौजूद है, लेकिन उसके फायदों को बड़े पैमाने पर लागू करने का सिस्टम नहीं है।

ट्रांसफॉर्मेशन के जरिए वैल्यू बढ़ाना

McKinsey ने AI एडॉप्शन को तीन स्टेज में बांटा है: एनेबलमेंट (Enablement), ऑटोमेशन (Automation), और रीइन्वेंशन (Reinvention)। 'एनेबलमेंट' स्टेज में, जब कर्मचारी व्यक्तिगत कामों के लिए सामान्य AI टूल्स का उपयोग करते हैं, केवल 13% कंपनियों ने ही कुछ खास एंटरप्राइज वैल्यू रिपोर्ट की। यह आंकड़ा 'ऑटोमेशन' स्टेज में बढ़कर 24% हो जाता है, जहां क्रॉस-फंक्शनल वर्कफ़्लो बेहतर होते हैं। सबसे बड़ा उछाल 'रीइन्वेंशन' स्टेज में आता है - जहां AI को केंद्र में रखकर बिजनेस मॉडल और कोर ऑपरेशन्स को फिर से डिजाइन किया जाता है - यहां 48% लीडर्स ने महत्वपूर्ण वैल्यू कैप्चर की बात कही।

डेटा बताता है कि शुरुआती स्टेज में अपनाया गया तरीका बहुत मायने रखता है। जिन ऑर्गनाइजेशन्स ने अपने वर्कफ़्लो को सक्रिय रूप से रीडिजाइन किया, वे उन कंपनियों की तुलना में 5 गुना ज्यादा बिजनेस वैल्यू हासिल करने में कामयाब रहीं, जिन्होंने मौजूदा पुराने सिस्टम्स पर सिर्फ AI टूल्स लगा दिए। इतना ही नहीं, लीडरशिप की महारत भी सफलता का एक बड़ा ड्राइवर बनी हुई है, AI-फ्लुएंट मैनेजमेंट टीम्स अपने AI इनिशिएटिव्स से पॉजिटिव फाइनेंशियल इंपैक्ट रिपोर्ट करने में लगभग 4 गुना ज्यादा सफल रहीं।

AI खर्च पर निवेशकों का नजरिया

निवेशकों के लिए, ये निष्कर्ष इस बात पर जोर देते हैं कि AI सॉफ्टवेयर और इंफ्रास्ट्रक्चर पर किया गया पूंजीगत खर्च अपने आप मुनाफे या उत्पादकता में सुधार नहीं लाता। AI में निवेश करने वाली कंपनियों के लिए असली कसौटी यह है कि वे संगठनात्मक बदलाव को कितनी अच्छी तरह लागू कर पाती हैं। निवेशकों को मैनेजमेंट की कमेंट्री में स्ट्रक्चरल ट्रांसफॉर्मेशन के संकेत देखने चाहिए, जैसे कि कोर ऑपरेटिंग मॉडल का रीडिजाइन, न कि सिर्फ व्यक्तिगत कर्मचारियों द्वारा AI टूल्स को अपनाना। विश्वास, लीडरशिप का तालमेल, और कल्चरल बदलाव को मैनेज करने की क्षमता को ऐसे आवश्यक गैर-तकनीकी कारक के रूप में पहचाना गया है जो यह तय करेंगे कि AI खर्च लॉन्ग-टर्म कॉम्पिटिटिव एडवांटेज की ओर ले जाएगा या फिर एक बेकार लागत साबित होगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.