PicSee बंद! फाउंडर मयंक बिदावत्का ने निवेशकों को लौटाए 60% फंड्स

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
PicSee बंद! फाउंडर मयंक बिदावत्का ने निवेशकों को लौटाए 60% फंड्स

स्टार्टअप की दुनिया से एक चौंकाने वाली खबर आई है। फाउंडर मयंक बिदावत्का अपनी AI फोटो-शेयरिंग स्टार्टअप PicSee को बंद कर रहे हैं। कंपनी ने निवेशकों से जुटाई गई रकम का लगभग 60-65% यानी करीब ₹30-35 करोड़ वापस लौटाने का फैसला किया है।

क्यों बंद हो रहा है PicSee?

कूं (Koo) के को-फाउंडर मयंक बिदावत्का ने अपने नए AI फोटो-शेयरिंग स्टार्टअप PicSee को बंद करने का ऐलान किया है। लॉन्च के एक साल से भी कम समय में, अक्टूबर 2025 में शुरू हुआ यह वेंचर अब बंद हो जाएगा। बिदावत्का के मुताबिक, कंपनी प्रोडक्ट-मार्केट फिट हासिल नहीं कर सकी, जिस वजह से आगे फंड लगाना संभव नहीं था।

यूजर ग्रोथ की बड़ी चुनौती

PicSee का मकसद AI फेशियल रिकग्निशन की मदद से दोस्तों के साथ फोटो पहचानना और शेयर करना था। ऐप को शुरुआती डाउनलोड्स तो मिले, लेकिन डिजिटल एडवरटाइजिंग से आए कई साइन-अप्स एक्टिव और एंगेज्ड यूजर्स में नहीं बदल पाए। सोशल ऐप के लिए नेटवर्क इफेक्ट बनाना बहुत जरूरी होता है, यानी यूजर्स खुद अपने दोस्तों को इनवाइट करें। इसके बिना, कस्टमर एक्विजिशन कॉस्ट (ग्राहक अधिग्रहण लागत) इतनी ज्यादा हो जाती है कि उसे मेंटेन करना मुश्किल हो जाता है। बिदावत्का ने माना कि टीम को इस बात का भरोसा नहीं था कि छोटे-मोटे अपडेट्स से ये फंडामेंटल दिक्कतें दूर हो जाएंगी।

निवेशकों को पैसे वापसी

PicSee ने जनरल कैटेलिस्ट (General Catalyst), ब्लूम वेंचर्स (Blume Ventures) और एथेरा (Athera) जैसे बड़े वेंचर कैपिटल फर्म्स से करीब ₹30 करोड़ से ₹35 करोड़ जुटाए थे। भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम में यह एक अनोखी बात है कि कंपनी अपने निवेशकों को जुटाई गई पूंजी का लगभग 60% से 65% वापस लौटा रही है। बाकी बची हुई कैश को किसी ऐसे प्रोजेक्ट पर खर्च करने के बजाय, जो स्केल नहीं कर पा रहा था, फाउंडर ने कैपिटल को बचाना बेहतर समझा।

पिछले वेंचर्स का अनुभव

यह मयंक बिदावत्का के लिए एक चुनौतीपूर्ण दौर है, क्योंकि उनका पिछला वेंचर, सोशल प्लेटफॉर्म कूं (Koo), भी जुलाई 2024 में बंद हो गया था। PicSee उनका तीसरा बड़ा वेंचर था, पहले उन्होंने 2012 में 'द मीडिया एंट' (The Media Ant) और 2015 में 'गुडबॉक्स' (Goodbox) की स्थापना की थी। निवेशकों के लिए, यह शटडाउन भारत में कंज्यूमर सोशल मीडिया सेक्टर के जोखिमों को दर्शाता है, जहां मार्केटिंग की भारी लागत, कम मार्जिन और स्थापित ग्लोबल प्लेटफॉर्म्स से मुकाबला करना एक बड़ी चुनौती है।

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