मैसाचुसेट्स सरकार ने एग्जीक्यूटिव ऑर्डर 658 जारी किया है। अब **25 मेगावाट** से बड़े नए डेटा सेंटर्स को क्लीन एनर्जी का उपयोग करना होगा, अन्यथा उन्हें एक सुरक्षा फंड में योगदान देना अनिवार्य होगा।
मैसाचुसेट्स सरकार ने डेटा सेंटर्स के लिए अपने रेगुलेटरी ढांचे को पूरी तरह बदल दिया है। गवर्नर मौरा हीली (Maura Healey) द्वारा हस्ताक्षरित एग्जीक्यूटिव ऑर्डर 658 के तहत, अब 25 मेगावाट से अधिक बिजली की मांग वाले किसी भी नए डेटा सेंटर को कड़े क्लीन एनर्जी और पारदर्शिता मानकों का पालन करना होगा।
क्या है नया नियम?
इस नए आदेश के मुताबिक, डेवलपर्स को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके प्रोजेक्ट्स स्वतंत्र और क्लीन ऊर्जा स्रोतों से चलें। यदि ऑपरेटर ऐसा करने में असमर्थ रहते हैं, तो उन्हें 'रेटपेयर प्रोटेक्शन फंड' (Ratepayer Protection Fund) में राशि जमा करनी होगी। इसका मुख्य उद्देश्य डेटा सेंटर्स की बढ़ती बिजली खपत और राज्य की ग्रिड विश्वसनीयता के बीच संतुलन बनाना है।
निवेशकों के लिए संकेत
जून 2026 में टैक्स इंसेंटिव्स पर लगी रोक के बाद, यह दूसरा बड़ा झटका है। नई गाइडलाइन्स में कम्युनिटी एग्रीमेंट्स और पारदर्शिता पर जोर दिया गया है, जिससे कंपनियों के लिए अनुपालन (Compliance) का खर्च बढ़ सकता है। इतना ही नहीं, प्रोजेक्ट्स के लिए परमिट मिलने में लगने वाला समय भी पहले की तुलना में अधिक हो सकता है, जो सीधे तौर पर प्रोजेक्ट की रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट (ROI) को प्रभावित कर सकता है।
अन्य राज्यों की राह पर मैसाचुसेट्स
यह कदम केवल एक राज्य तक सीमित नहीं है, बल्कि अमेरिका में एक व्यापक रुझान को दर्शाता है। टेक्सास और न्यूयॉर्क जैसे राज्य भी पहले से ही डेटा सेंटर्स की बढ़ती मांग और बिजली ग्रिड पर पड़ रहे दबाव के मद्देनजर सख्त निगरानी रख रहे हैं। अब देखना यह होगा कि टेक कंपनियां अपनी भविष्य की विस्तार योजनाओं में इन नई चुनौतियों को कैसे मैनेज करती हैं।
