Mahindra Group की सप्लाई चेन सर्विस कंपनी Bristlecone ने **24%** की सालाना रेवेन्यू ग्रोथ दर्ज की है। कंपनी अब AI-आधारित सॉफ्टवेयर की ओर रुख कर रही है ताकि **$1 बिलियन** का वैल्यूएशन हासिल किया जा सके। हालांकि यह कंपनी प्राइवेट है और शेयर बाजार पर उपलब्ध नहीं है, लेकिन इसकी ग्रोथ रणनीति Mahindra Group के इकोसिस्टम पर नजर रखने वाले निवेशकों के लिए अहम है।
Mahindra Group की सप्लाई चेन कंसल्टिंग शाखा, Bristlecone अब एक बड़े मुकाम की ओर बढ़ रही है। कंपनी ने हाल ही में 24% की साल-दर-साल रेवेन्यू बढ़ोतरी दर्ज की है, जिसके पीछे 15 नए फॉर्च्यून 1000 क्लाइंट्स का जुड़ना मुख्य कारण है। हालांकि, निवेशकों को यह याद रखना चाहिए कि Bristlecone एक प्राइवेट सब्सिडियरी है और यह शेयर बाजार में लिस्टेड नहीं है, इसलिए इसमें सीधे निवेश का मौका नहीं है।
AI का दांव और बिजनेस मॉडल में बदलाव
पहले कंपनी का काम ERP जैसे स्टैंडर्ड सॉफ्टवेयर के जरिए सप्लाई चेन को मैनेज करना था, लेकिन अब कंपनी अपना ध्यान पूरी तरह से प्रोप्राइटरी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और सॉफ्टवेयर सॉल्यूशंस पर लगा रही है। कंपनी अपने कुल रेवेन्यू का करीब 10% हिस्सा इसी इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी को बनाने में खर्च कर रही है। यह बदलाव प्रॉफिट मार्जिन को बढ़ाने के लिए किया गया है, क्योंकि सर्विस-आधारित मॉडल की तुलना में सॉफ्टवेयर-आधारित मॉडल को स्केल करना कहीं ज्यादा आसान होता है।
चुनौतियां और प्रतिस्पर्धा
Bristlecone की ग्रोथ अभी हाई-टेक, मैन्युफैक्चरिंग और लाइफ साइंसेज सेक्टर की मजबूत मांग पर टिकी है। सेमीकंडक्टर और डेटा सेंटर सेक्टर में आ रहे उछाल का कंपनी को सीधा फायदा मिल रहा है। हालांकि, इस सेक्टर में प्रतिस्पर्धा बहुत कड़ी है। कंपनी को Tata Consultancy Services, Infosys और ग्लोबल दिग्गज Accenture जैसे बड़े खिलाड़ियों से मुकाबला करना पड़ रहा है, जो खुद भी AI में भारी निवेश कर रहे हैं।
इसके अलावा, हाई-टेक और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर निर्भरता कंपनी के लिए रिस्क भी पैदा करती है। यदि सेमीकंडक्टर की मांग में वैश्विक स्तर पर सुस्ती आती है, तो इसका असर कंपनी की ग्रोथ पर पड़ सकता है। साथ ही, सर्विस मॉडल से सॉफ्टवेयर मॉडल की ओर शिफ्ट होने में एग्जीक्यूशन रिस्क भी बना हुआ है।
