चेन्नई की AI फर्म Mad Street Den के को-फाउंडर्स Ashwini Asokan और Anand Chandrasekaran ने **$50 मिलियन** की सीरीज़ डी फंडिंग राउंड को शर्तों के कारण मना कर दिया है। उन्होंने कंपनी को M2P Fintech को बेच दिया है।
फाउंडर्स ने क्यों ठुकराई डील?
Mad Street Den की को-फाउंडर्स Ashwini Asokan और Anand Chandrasekaran ने दिसंबर 2023 में $50 मिलियन की फंडिंग लेने से इनकार कर दिया। लीड इन्वेस्टर ने ऐसे टर्म्स रखे थे जो शुरुआती निवेशकों के लिए हिस्सेदारी बेचने पर रोक लगाते। इन शर्तों और बड़े डाइल्यूशन (Dilution) के कारण, फाउंडर्स ने कंपनी की लंबी अवधि की स्वतंत्रता और शुरुआती निवेशकों के हितों को सुरक्षित रखने का फैसला किया।
M2P Fintech के साथ रणनीतिक कदम
फंडिंग डील से पीछे हटने के बाद, फाउंडर्स ने कंपनी को जारी रखने और हितधारकों के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करने के लिए वैकल्पिक रास्ता चुना। इसके चलते Mad Street Den को M2P Fintech ने $50 मिलियन से $100 मिलियन के बीच की डील में खरीद लिया। इस अधिग्रहण के माध्यम से, फाउंडर्स ने कंपनी की इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी (Intellectual Property), मौजूदा क्लाइंट कॉन्ट्रैक्ट्स और बचे हुए कर्मचारियों को सफलतापूर्वक ट्रांसफर किया। यह एक रणनीतिक निकास था जिसने शुरुआती निवेशकों और टीम के सदस्यों की सुरक्षा की।
AI में शुरुआती दौर के अग्रणी
2013 में स्थापित, Mad Street Den भारत में जेनरेटिव AI (Generative AI) के बूम से बहुत पहले ही काम कर रही थी। कंपनी अपने Vue.ai प्लेटफॉर्म के लिए जानी जाती थी। 2015 तक, कंपनी ने इमेज, टेक्स्ट और ट्रांजैक्शन डेटा में पैटर्न खोजने के लिए एक वेक्टर सर्च इंजन (Vector Search Engine) विकसित कर लिया था। यह टेक्नोलॉजी आज की रिट्रीवल-ऑग्मेंटेड जनरेशन (Retrieval-Augmented Generation) तकनीकों का अग्रदूत थी। फाउंडर्स ने अक्सर भारतीय वेंचर कैपिटल (Venture Capital) इकोसिस्टम में जटिल AI एप्लीकेशन्स को समझाने में लगने वाले लंबे समय के संघर्ष का जिक्र किया है।
भविष्य की राह
हालांकि Mad Street Den का AI ऑपरेशन अब M2P Fintech का हिस्सा है, Ashwini Asokan और Anand Chandrasekaran का टेक्नोलॉजी सेक्टर में सक्रिय रहना जारी रहेगा। वे इस ट्रांजिशन को अपनी तकनीकी महत्वाकांक्षाओं का अंत नहीं, बल्कि भविष्य के वेंचर्स के लिए एक प्लेटफॉर्म मानते हैं। उनकी लॉन्ग-टर्म विजन में सॉफ्टवेयर, हार्डवेयर, रोबोटिक्स और स्पेस टेक्नोलॉजी में आगे विकास शामिल है।
