भारतीय मोबाइल ब्रांड्स Lava और Ai+ बजट सेगमेंट में अपनी पैठ तेजी से बढ़ा रहे हैं। चीनी प्रतिद्वंदियों का प्रीमियम मॉडल्स की ओर झुकाव और मेमोरी चिप्स की बढ़ती लागत के कारण बाजार में एक बड़ा खालीपन पैदा हुआ है, जिसका फायदा देसी कंपनियों को मिल रहा है।
भारतीय स्मार्टफोन बाजार में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। सालों तक बजट सेगमेंट पर राज करने वाली Xiaomi, Vivo और Oppo जैसी चीनी कंपनियां अब अपने प्रॉफिट मार्जिन को बचाने के लिए प्रीमियम डिवाइसेस पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं। इसकी मुख्य वजह मेमोरी कंपोनेंट्स की कीमतों में 40% तक का इजाफा है। इस रणनीतिक बदलाव ने Lava और Ai+ जैसी घरेलू कंपनियों के लिए एंट्री-लेवल मार्केट में बड़ा मौका तैयार कर दिया है।
मजबूत औद्योगिक आधार
इस बार का बदलाव पिछले प्रयासों से कहीं ज्यादा ठोस है। फाइनेंशियल ईयर 2026 में भारतीय मोबाइल फोन इंडस्ट्री ने रिकॉर्ड ₹6.27 लाख करोड़ का प्रोडक्शन किया है। सरकार की प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव स्कीम और Dixon Technologies जैसे कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरर्स के सहयोग से घरेलू कंपनियां अब डिजाइन और ब्रांडिंग पर बेहतर फोकस कर पा रही हैं।
नई पॉलिसी और भविष्य की चुनौती
सरकार की नई 'मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम' अब केवल असेंबली के बजाय रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) को बढ़ावा दे रही है। यही वजह है कि घरेलू प्लेयर्स की मार्केट हिस्सेदारी 8 साल के उच्चतम स्तर 7% पर पहुंच गई है।
हालांकि, चुनौतियां अभी खत्म नहीं हुई हैं। कुल शिपमेंट्स में 20% की गिरावट बाजार में सुस्ती का संकेत है। Lava और Ai+ की लंबी दौड़ की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वे अपने आफ्टर-सेल्स सर्विस नेटवर्क को कितना मजबूत बनाते हैं और ग्राहकों को लगातार सॉफ्टवेयर अपडेट्स के जरिए कितना भरोसा दिला पाते हैं।
