Ann Arbor की स्टार्टअप Laplace Intelligence ने ऑटोनॉमस वाहनों और रोबोट्स की सुरक्षा जांच को ऑटोमेट कर दिया है। यह कंपनी अब धीरे-धीरे मैनुअल टेस्टिंग की जगह ले रही है, जिससे कमर्शियल इस्तेमाल का रास्ता साफ होगा।
अब AI करेगा खतरों की पहचान
ऑटोनॉमस और रोबोटिक्स सेक्टर में सेफ्टी टेस्टिंग हमेशा से ही एक बड़ी चुनौती रही है। अभी तक यह काम इंसानों द्वारा किया जाता था, जो काफी धीमा और महंगा प्रोसेस था। यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन से जुड़ी यह स्टार्टअप अब 'ऑटोमेटेड रेड-टीमिंग' का उपयोग कर रही है। इसमें AI एजेंट्स खुद ही सिस्टम की कमजोरियों को ढूंढ निकालते हैं, जिससे वाहनों को असल दुनिया में उतारने से पहले ही उनकी सुरक्षा पक्की की जा सके।
हाई-फिडेलिटी सिमुलेशन की ताकत
कंपनी ने Nvidia की Cosmos टेक्नोलॉजी का सहारा लिया है। TomTom के डेटा को जोड़कर यह कंपनी एक वर्चुअल दुनिया तैयार करती है। यहां खराब मौसम या अचानक ट्रैफिक जाम जैसी स्थितियां बनाकर वाहनों को टेस्ट किया जाता है, जिससे सड़कों पर जोखिम भरा ट्रायल करने की जरूरत कम हो जाती है।
रेवेन्यू मॉडल और बाजार में पकड़
कंपनी अभी शुरुआती दौर में है, लेकिन इसने Bot Auto जैसी ट्रकिंग फर्मों और एक अज्ञात जापानी ऑटोमोटिव कंपनी के साथ कॉन्ट्रैक्ट हासिल कर लिए हैं। इसके अलावा, सैन होज़े में Nvidia और T-Mobile के साथ स्मार्ट सिटी पायलट प्रोग्राम में भी कंपनी शामिल है।
बड़ी चुनौतियां
बाजार में Applied Intuition जैसे दिग्गज पहले से मौजूद हैं। Laplace के लिए सबसे बड़ी चुनौती अपने AI-लेड टेस्टिंग मॉडल को इंडस्ट्री के कड़े मानकों पर साबित करना होगा, ताकि बीमा कंपनियों और रेगुलेटर्स का भरोसा जीता जा सके। निवेशकों की नजर अब इस पर होगी कि क्या कंपनी अपने प्रोजेक्ट-बेस्ड रेवेन्यू को एक स्टेबल सब्सक्रिप्शन मॉडल में बदल पाती है या नहीं।
