L&T Semiconductor Technologies और Tata Electronics ने सेमीकंडक्टर चिप्स के डिजाइन और मैन्युफैक्चरिंग के लिए हाथ मिलाया है। इस पार्टनरशिप से ऑटोमोटिव और इंडस्ट्रियल सेक्टर के लिए भारत में ही चिप्स तैयार किए जाएंगे।
भारत की 'सेमीकंडक्टर हब' बनने की राह
Larsen & Toubro की यूनिट 'L&T Semiconductor Technologies' (LTSCT) और 'Tata Electronics' ने एक स्ट्रैटेजिक एग्रीमेंट साइन किया है। इस डील के तहत, L&T चिप डिजाइनिंग पर ध्यान केंद्रित करेगी, जबकि Tata Electronics चिप की मैन्युफैक्चरिंग, असेंबली और टेस्टिंग का काम संभालेगी। यह साझेदारी ऑटोमोटिव, इंडस्ट्रियल, कम्युनिकेशन और सिक्योरिटी जैसे महत्वपूर्ण सेक्टर्स की जरूरतों को पूरा करने के लिए तैयार की गई है।
निवेशकों के लिए क्या है खास?
भारत के लिए यह एक बड़ा मील का पत्थर है, क्योंकि अब तक हम चिप्स के लिए पूरी तरह से ग्लोबल सप्लायर्स पर निर्भर रहे हैं। हालांकि, सेमीकंडक्टर बिजनेस बेहद कैपिटल-इंटेंसिव (Capital-intensive) होता है। निवेशकों को यह ध्यान में रखना होगा कि इसमें हाई रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) लागत के साथ-साथ ग्लोबल मार्केट के बड़े प्लेयर्स जैसे ताइवान, दक्षिण कोरिया और चीन से कड़ी प्रतिस्पर्धा भी मिलेगी।
आगे क्या ट्रैक करें?
शेयरधारकों के लिए अब सबसे जरूरी है इन कंपनियों का 'कमर्शियल प्रोडक्शन टाइमलाइन'। टाटा की मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटीज की प्रगति और चिप्स की मार्केट डिमांड ही यह तय करेगी कि यह प्रोजेक्ट लॉन्ग-टर्म में कितना प्रॉफिटेबल साबित होगा। फिलहाल मार्केट की नजर मैनेजमेंट के कमेंट्री और ऑर्डर बुक की स्थिति पर बनी रहेगी।
