Larsen & Toubro (L&T) की सेमीकंडक्टर यूनिट ने फाइनेंशियल ईयर 2031 तक सालाना **$500 मिलियन** का रेवेन्यू हासिल करने का लक्ष्य रखा है। कंपनी पावर और इंडस्ट्रियल सेक्टर के लिए चिप डिजाइन पर फोकस कर रही है और अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा एक्सपोर्ट से आने की उम्मीद है।
इंजीनियरिंग दिग्गज Larsen & Toubro (L&T) की सब्सिडियरी L&T Semiconductor Technologies ने फाइनेंशियल ईयर 2030-31 तक सालाना $500 मिलियन का रेवेन्यू जुटाने का महत्वाकांक्षी प्लान बनाया है। नवंबर 2023 में स्थापित हुई यह कंपनी सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग की महंगी दुनिया में उतरने के बजाय चिप डिजाइन में स्पेशलिस्ट बनने पर ध्यान केंद्रित कर रही है। कंपनी के CEO संदीप कुमार ने बताया है कि भविष्य की कमाई का 70% से 80% हिस्सा इंटरनेशनल मार्केट्स से आने की उम्मीद है, जो स्पेशलाइज्ड चिप डिजाइन सेवाओं की ग्लोबल डिमांड को दर्शाता है।
शुरुआती दौर से ग्रोथ का सफर
यह कंपनी अभी डेवलपमेंट के शुरुआती दौर में है। फाइनेंशियल ईयर 2026 के लिए इसका ऑपरेटिंग रेवेन्यू केवल ₹13.52 करोड़ था। अगले चार सालों में $500 मिलियन के लक्ष्य तक पहुंचने के लिए कंपनी को तेज और लगातार ग्रोथ दिखानी होगी। L&T इस विस्तार के लिए सब्सिडियरी को FY26 में ₹541.97 करोड़ का फंड दे रही है, जिससे इस वेंचर में कुल निवेश ₹859 करोड़ तक पहुंच गया है। यह कैपिटल इन्वेस्टमेंट टेक्नोलॉजी सेक्टर में ग्रुप के लॉन्ग-टर्म इंटरेस्ट को दिखाता है, लेकिन साथ ही पैरेंट कंपनी के लिए भारी शुरुआती खर्च का संकेत भी देता है।
चिप डिजाइन पर स्ट्रैटेजिक फोकस
कई दूसरी भारतीय कंपनियां जो सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन पर विचार कर रही हैं, उनसे अलग L&T Semiconductor डिजाइन के क्षेत्र में काम कर रही है। इसके टारगेट एरिया में पावर इंफ्रास्ट्रक्चर, इंडस्ट्रियल मोटर्स, सिक्योरिटी डिवाइसेज और डेटा सेंटर कंपोनेंट्स शामिल हैं। फैब्रिकेशन प्लांट्स बनाने की भारी लागत से बचकर, कंपनी एक फ्लेक्सिबल बिजनेस मॉडल बनाए रखना चाहती है। मैनेजमेंट का कहना है कि कंपनी सीलिंग फैन और चार्जर जैसे कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए भी डिजाइन एक्सप्लोर कर रही है, हालांकि बेहतर प्रॉफिट मार्जिन बनाए रखने के लिए वह मास-मार्केट कंज्यूमर गुड्स के बजाय हाई-वैल्यू इंडस्ट्रियल एप्लीकेशन्स को प्राथमिकता दे सकती है।
निवेशकों के लिए निगरानी और इंडस्ट्री का माहौल
निवेशकों के लिए मुख्य बात यह होगी कि कंपनी अपने डिजाइन पाइपलाइन को कितना अच्छे से एक्जीक्यूट कर पाती है और इंटरनेशनल क्लाइंट्स से कितने लॉन्ग-टर्म कॉन्ट्रैक्ट्स हासिल करती है। कंपनी सरकार के आने वाले Semicon 2.0 इंसेंटिव प्रोग्राम की डिटेल्स का इंतजार कर रही है, जो उसके ग्रोथ प्लान्स को अतिरिक्त सपोर्ट दे सकता है। सेमीकंडक्टर डिजाइन इंडस्ट्री बेहद कॉम्पिटिटिव है और इसमें लगातार रिसर्च पर खर्च की जरूरत होती है, इसलिए स्केलिंग के साथ-साथ प्रॉफिट मार्जिन को मैनेज करने की कंपनी की क्षमता महत्वपूर्ण होगी। इसके अलावा, कंपनी ने जानबूझकर सर्वर चिप मार्केट से परहेज किया है क्योंकि इसमें बहुत लंबे इन्वेस्टमेंट साइकिल होते हैं, और इसके बजाय स्पेशलाइज्ड चिप्स पर फोकस करना चुना है जहां वह ग्लोबल प्लेयर्स के साथ बेहतर ढंग से प्रतिस्पर्धा कर सके। प्रोडक्ट लॉन्च, एक्सपोर्ट कॉन्ट्रैक्ट्स की जीत और सरकारी इंसेंटिव्स के इस्तेमाल पर भविष्य के अपडेट्स इस वेंचर की प्रगति के मुख्य संकेतक होंगे।
