कुडनकुलम न्यूक्लियर पावर प्लांट, भारत की सबसे बड़ी परमाणु ऊर्जा सुविधा, साइबर हमले का शिकार हुई है। हैकर्स के एक समूह ने प्लांट से जुड़ी संवेदनशील जानकारी, जिसमें फैसिलिटी के ब्लूप्रिंट और कंट्रोल रूम लेआउट शामिल हैं, को डार्क वेब पर लीक कर दिया है।
कुडनकुलम न्यूक्लियर प्लांट से बड़ी सेंध
भारत के सबसे बड़े परमाणु ऊर्जा संयंत्र, कुडनकुलम न्यूक्लियर पावर प्लांट (Kudankulam Nuclear Power Plant), से जुड़ी गोपनीय जानकारी लीक होने की खबर सामने आई है। 'वर्ल्ड लीक्स' (World Leaks) नाम के एक रैंसमवेयर ग्रुप ने दावा किया है कि उसने प्लांट के आंतरिक दस्तावेज़ों का एक बड़ा जखीरा चुरा लिया है और उसे डार्क वेब पर पोस्ट कर दिया है। इन लीक हुए दस्तावेज़ों में प्लांट के ब्लूप्रिंट, सप्लायर की जानकारी, इंस्पेक्शन रिकॉर्ड और कंट्रोल रूम के लेआउट जैसी बेहद संवेदनशील चीजें शामिल बताई जा रही हैं। इन दस्तावेज़ों का संबंध 2016 से 2025 तक की अवधि से है, जो देश की महत्वपूर्ण राष्ट्रीय इंफ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
Reliance Group और थर्ड-पार्टी सर्वर का मामला
इस मामले में Reliance Infrastructure, जो प्लांट के निर्माण से जुड़े एक कांट्रैक्टर हैं, ने एक आंशिक डेटा ब्रीच (partial data breach) की पुष्टि की है। कंपनी के मुताबिक, यह सेंध उनके एक थर्ड-पार्टी सर्विस प्रोवाइडर, Yotta, के सर्वर पर लगी थी। Yotta ने 29 मई, 2026 को संदिग्ध गतिविधि को पहचाना और रोका था, लेकिन बाद में उन्होंने पुष्टि की कि बाहरी हैकर्स ने सर्वर पर मौजूद डेटा चुरा लिया है। Reliance Group ने इस घटना की सूचना सरकारी अधिकारियों को दे दी है, हालांकि उन्होंने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि कौन-कौन से विशिष्ट फाइलें प्रभावित हुई हैं।
जांच और सुरक्षा की कड़ी निगरानी
न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCIL), जो प्लांट के संचालन के लिए जिम्मेदार है, Reliance Infrastructure और इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम (CERT-In) के साथ मिलकर स्थिति का आकलन कर रही है। जांच का मुख्य फोकस इस बात पर है कि कितना डेटा लीक हुआ है और प्लांट के संचालन पर इसका क्या असर पड़ सकता है। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि लीक हुई जानकारी प्लांट की ऑपरेशनल सुरक्षा के लिए खतरा है या सिर्फ प्रशासनिक और कांट्रैक्ट संबंधी दस्तावेज़ों तक सीमित है।
साइबर सुरक्षा पर पहले भी उठे सवाल
यह पहली बार नहीं है जब कुडनकुलम प्लांट की साइबर सुरक्षा पर सवाल उठे हों। इससे पहले 2019 में भी प्लांट के एक एडमिनिस्ट्रेटिव नेटवर्क पर मैलवेयर (malware) का पता चला था। तब NPCIL ने स्पष्ट किया था कि प्लांट के महत्वपूर्ण न्यूक्लियर कंट्रोल सिस्टम पूरी तरह से अलग थे और प्रभावित नहीं हुए थे। भारत के महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर पर साइबर हमलों का खतरा लगातार बढ़ रहा है, जिससे निजी कांट्रैक्टर्स और थर्ड-पार्टी सर्विस प्रोवाइडर्स के डेटा सुरक्षा अभ्यासों पर अधिक ध्यान देने की जरूरत है। निवेशक और हितधारक इस जांच के नतीजों पर बारीकी से नज़र रखेंगे, क्योंकि ऐसे मामले कड़े नियामक नियमों और कांट्रैक्टर्स के लिए बढ़ी हुई परिचालन लागत का कारण बन सकते हैं।
